मणिपुर: जानिए क्यों लपीजी के दाम पहुंचे 3000 के पार

मणिपुर में एक नवंबर को सात नए जिले बनाने के बाद से शुरू हुई नाकेबंदी ने वहां के लोगों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। नागालैंड में पिछले 50 दिनों से चली आ रही आर्थिक नाकाबंदी से मणिपुर के लोग बेहाल हैं।

मणिपुर: जानिए क्यों लपीजी के दाम पहुंचे 3000 के पार

इंफाल, मणिपुर में एक नवंबर को सात नए जिले बनाने के बाद से शुरू हुई नाकेबंदी ने वहां के लोगों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। नागालैंड में पिछले 50 दिनों से चली आ रही आर्थिक नाकाबंदी से मणिपुर के लोग बेहाल हैं।

यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने 1 नवंबर से मणिपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-2 और 37 की नाकेबंदी कर रहा है। इम्फाल में ये जीवन रेखा के मुख्य मार्ग हैं, जिन्हें बद कर दिया गया है। इस कारण रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं की कीमत आसमान छू रही है।

पैट्रोल को 300 रुपए से अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है, जबकि एलपीजी रसोई गैस सिलेंडर को लगभग 3,000 रुपए की महंगी कीमत पर बिक रहे हैं। राज्य के गृह मंत्री किरण रिजिजू ने स्थिति का जायजा लेने के लिए कल इम्फाल दौरा किया।

जानिए क्यों हुआ ऐसा

मणिपुर राजनीतिकरण के परिणामस्वरुप लगातार संकट का गवाह बना है। जातीय मतभेद, जिनमें नागा-मेइती और नागा-कुकी के जातीय मतभेद शामिल है।

नागा राज्य की जनसंख्या में 20 प्रतिशत है , जबकि मेइती ( ज्यादातर वैष्णव) 65 फीसदी का योगदान है और कुकी-चिन समूहों में 13 फीसद तक है।

सात नए जिले

8 दिसंबर को सरकार ने सात नए जिले बनाने की घोषणा की, जिनमें से पांच जिलों में नागा, कुकी, पेटिस जातियों और अन्य जनजातियों का प्रभुत्व है। बाकी जिलों में मेइती जाति का प्रभुत्व है।

इंफाल घाटी में कर्फ्यू

इंफाल घाटी के आस-पास में जातीय हिंसा भड़क जाने के बाद 18 दिसंबर को कर्फ्यू लगाया गया था।