मद्रास HC ने 'शरिया अदालत' पर रोक लगाई

मद्रास हाईकोर्ट ने मस्जिद में चल रही शरिया अदालत पर रोक लगा दी, साथ ही कहा- 'धार्मिक और पूजा स्थल केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए होते हैं।'

मद्रास HC ने

मद्रास हाई कोर्ट ने चेन्नई के एक मस्जिद में चल रही शरिया अदालत पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर को अपने फैसले में कहा कि धार्मिक और पूजा स्थल केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए होते हैं। कोर्ट  ने राज्य सरकार को भी यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि ऐसे स्थलों पर कोई न्यायिक मंच न हो और चार हफ्तों में इस पर स्थिति रिपोर्ट सौंपी जाए।

मुख्य न्यायाधीश संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम. सुंदर की पीठ ने ब्रिटेन में रहने वाले अप्रवासी भारतीय अब्दुल रहमान की जनहित याचिका पर यह आदेश जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि राज्य में मक्का मस्जिद शरीयत काउंसिल और इसी तरह के अन्य मंचों के कारण बड़ी संख्या में निर्दोष मुस्लिम परेशानी सह रहे हैं।

रहमान ने चेन्नई के अन्नासलाई इलाके में स्थित मक्का मस्जिद शरीयत काउंसिल के कामकाज पर रोक लगाने की भी मांग की थी। मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता ए. सिराजुद्दीन रहमान ने बताया कि याचिकाकर्ता अपनी छोड़ चुकी पत्नी के साथ दोबारा रहना चाहता है। इसके लिए वह शरीयत परिषद की शरण में गया था, लेकिन उस पर तलाक देने का दबाव डाला गया।

इस पर कोर्ट ने कहा कि धार्मिक स्थान या पूजा स्थल सिर्फ धार्मिक कार्यों के लिए होने चाहिए। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि आने वाले चार हफ्तों में इस तरह की शरिया अदालतें बंद की जाएं और इसकी स्थिति रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी जाए।