नया मुस्लिम-दलित गठजोड़ बनाने में जुटी मायावती

बसपा उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनावों में हाशिए पर आ गई थी। पार्टी पूरे दमखम के साथ विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है। मायावती राज्य में इस बार दलित मुस्लिम गठजोड़ के प्रयास में लगी हैं....

नया मुस्लिम-दलित गठजोड़ बनाने में जुटी मायावती

-नरेन्द्र कुमार वर्मा

उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है राजनीतिक दल सियासी चक्रव्यूह की रचना में लगे है। गठबंधन को आतुर कांग्रेस के रणनीतिकार, पारिवारिक कलह को दूर करने में लगा सपा परिवार, दलितों और मुस्लिमों को विश्वास दिलाती मायावती और दलित मतों को साधने के लिए धम्म चेतना यात्रा और डॉ. अंबेडकर के कार्यक्रमों पर केंद्र सरकार का फोकस। सभी दल अपने हिसाब से प्रदेश में चुनावी जमीन तैयार कर रहे हैं।

राज्य के चारों प्रमुख दल चुनावों से पूर्व सभी जमीनी संभावनाओं और संगठन को दुरुस्त कर लेना चाहते हैं। लोकसभा चुनावों में सूपड़ा साफ होने के बाद बसपा के लिए यह चुनाव बहुत मायने रखता है। पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी के बाद प्रदेश के अपरकास्ट के बीच भाजपा की विश्वनीयता में इजाफा हुआ है। बसपा के कई वरिष्ठ नेताओं के भाजपा में जाने से भी बसपा को बहुत नुकसान झेलना पड़ा। मायावती दिन रात इसकी भरपाई की कोशिशों में लगी हैं। साल 2007 में बसपा 30.43 फीसदी वोट पाकर सत्ता में पहुंची थी। जबकि साल 2012 में सपा ने केवल 29.1 फीसदी वोट लेकर पूर्ण बहुमत की सरकार का गठन किया था।

राज्य के 22 फीसदी दलितों और 18 फीसदी मुसलमानों को साधना मायावती के लिए कठिन साबित हो रहा है। सपा में चाचा भतीजा प्रकरण के बाद मायावती को लगा था कि यादव परिवार के संघर्ष का मुसलमानों के बीच गलत संदेश जाएगा। मगर मुलायम सिंह ने बड़ी होशियारी के साथ डैमेज कंट्रोल कर लिया। सपा की इस एकजुटता से बसपा का गणित दोबारा बिगड़ गया। मुलायम सिंह के खिलाफ मुसलमानों के बीच बुकलेट वितरित कराने का भी कोई लाभ पार्टी को मिलता नहीं दिख रहा। दयाशंकर सिंह प्रकरण के बाद अपरकास्ट खासकर ब्राह्मण और राजपूतों का बसपा से मोहभंग हो चुका है। जिस दमदारी के साथ ब्राह्मण और राजपूत पहले बसपा के साथ खड़े थे वैसा 2017 में दिखाई नहीं देता।

मायावती को इस बात का आभास है कि पूर्व की तरह ब्राह्मण, मुस्लिम, राजपूत और दलित एक साथ पार्टी के पाले में नहीं खड़े हो सकते। लिहाजा बसपा प्रमुख ने इस बार सोशल इंजीनियरिंग का अपना पुराना फार्मूला त्याग कर सारा ध्यान दलित-मुस्लिम गठजोड़ पर फोकस कर लिया है। पार्टी 403 में 130 मुस्लिम उम्मीदवारों की अब तक घोषणा कर चुकी है। बसपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अगर जरुरत महसूस हुई तो हम 150 तक मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतार सकते है क्योंकि राज्य की 200 सीटों पर मुस्लिम सीधे प्रभावशाली भूमिका में है। बसपा को इस बात का भरोसा हैं कि दलित मुस्लिम गठजोड़ के बलबूते पर वह सत्ता में आ सकती है। लिहाजा राज्य भर में बसपा नेता मुसलमानों के बीच इस संदेश को प्रचारित कर रहे हैं।

मगर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि राज्य के मुसलमानों का बसपा के प्रति नजरिया सपा की तरह स्पष्ट नहीं है। लिहाजा बसपा नेता मुसलमानों को समझा रहे हैं कि इस बार अगर बट गए तो भाजपा इस बटवारे का फायदा उठा कर सत्ता में आ जाएगी। मायावती ने मुस्लिमों पर गाय के बहाने नया तीर फेंका है कि दलितों और मुस्लिमों का भाजपा गाय के बहाने उत्पीड़न कर रही है अगर वह सत्ता में आईं तो किसी की हिम्मत नहीं होगी तो गाय लेकर उन पर निशाना साधे।

(ये लेखक के निजी विचार हैं, लेखक वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार हैं।)