मुसलमानों को लुभाने में जुटी मायावती

उत्तर प्रदेश के मुस्लिम मतदाताओं को लेकर सपा और बसपा में घमासान मचा हुआ है। मुलायम सिंह पूरी शिद्दत के साथ मुसलमानों को साधने में जुटे है तो मायावती ने एक प्रदेश के मुसलमानों के बीच एक बुकलेट वितरण शुरू करवा दिया। बसपा द्वारा जारी इस आठ पन्नों की बुकलेट में मायावती ने यह दर्शाने की कोशिस की है कि वे मुसलमानों की सच्ची हितैषी है...

मुसलमानों को लुभाने में जुटी मायावती

नरेन्द्र कुमार वर्मा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की घोषणा होने में कुछ ही वक्त बचा है। ऐसे में राजनीतिक दलों ने एक दूसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप लगाना शुरू कर दिया है। सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम दिन-रात इस प्रयास में जुटे हैं कि किसी भी तरह मुस्लिम मतों का एक बड़ा हिस्सा उनके पाले में बना रहे। बसपा सुप्रीमो मायावती ने जब देखा कि स्वामी प्रसाद मौर्य और आरके चौधरी जैसे नेता जब उनका साथ छोड़ गए तो अति पिछड़े समाज का खिसकना तय है। ऐसे में बसपा ने सारा फोकस मुस्लिमों पर केंद्रीत कर दिया है। मायावती मुस्लिम और दलित गठजोड़ के फार्मूले पर प्रदेश में सत्ता समीकरणों को साधना चाहती हैं। लिहाजा मुस्लिमों के बीच इन दिनों बसपा एक आठ पन्नों की बुकलेट वितरित करवा रही है।

मुस्लिम समाज का सच्चा हितैषी कौन, फैसला आप खुद करें शीर्षक वाली यह बुकलेट हिंदी और उर्दू में तैयार की गई है। बसपा के एक नेता नारदा न्यूज से कहते हैं कि हमारा उद्देश्य साफ है हम राज्य के मुसलमानों को यह समझाना चाहते हैं कि उनका सच्चा हितैषी कौन है। बसपा द्वारा जारी इस बुकलेट में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर जमकर प्रहार किया गया है। मायावती ने तथ्यों के आधार पर यह साबित करने का पुरजोर प्रयास किया है कि मुलायम सिंह अंदरखाने भाजपा और आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) से मिले हुए है। बुकेलट में कहा गया हैं कि कल्याण सिंह और साक्षी महाराज जैसे कट्टर छवि वाले नेताओं से हाथ किसने मिलाया? मुसलमानों के बीच पढ़ी जा रही इस बुकलेट में लिखा है कि मुलायम सिंह पहली बार 1967 में जनसंघ के सहयोग से ही विधानसभा में पहुंचे थे। 1977 में वे उस सरकार में शामिल थे जिसमें जनसंघ के लोग भी शामिल थे। बसपा ने सपा और भाजपा की मिलीभगत को साबित करने का प्रयास किया है।

बुकलेट में कहा गया हैं कि साल 2012 में सपा ने मुसलमानों के वोट से सरकार बनाई जिसके बाद राज्य में 400 सांप्रदायिक दंगे हुए। मुजफ्फरनगर में हुए बड़े दंगे का दंश मुसलमानों को जानमाल से झेलना पड़ा। चुनावों से पूर्व मायावती ने जोरदार तरीके से मुसलमानों के बीच इस बात को रखने का प्रयास किया हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सपा मुखिया के बीच प्रगाढ़ रिश्ते है। बुकलेट में बसपा ने लिखा हैं कि सपा प्रमुख के यहां आयोजित होने वाले मांगलिक आयोजनों में नरेंद्र मोदी जब शिरकत करते हैं तो सपा के किसी भी मुस्लिम मंत्री को मंच पर नहीं चढ़ने दिया जाता।

दरअसल मायावती सारी कवायद मुस्लिम वोटों को हासिल करने में लगा रही हैं। लिहाजा चुन-चुन कर ऐसे तथ्यों को इस बुकलेट में शामिल किया गया हैं जिससे मुसलमानों के बीच मुलायम सिंह यादव की छवि घूमिल हो सके। जबकि राज्य के मुस्लिम तबके में एक समय में मुलायम सिंह यादव की मजबूत पकड़ थी। 1990 में बाबरी मस्जिद के की तरफ जा रहे कारसेवकों पर मुलायम सिंह यादव ने गोली चलाने के आदेश दिए थे। इस आदेश के बाद प्रदेश के मुसलमानों के बीच मुलायम सिंह यादव की अलग छवि कायम हुई थी। जिसके बाद सपा ने मुस्लिम नेताओं को आगे बढ़ाना शुरू किया। जबकि मायावती तीन बार भाजपा के सहयोग से मुख्यमंत्री बन चुकी है। हालांकि उन्होंने इस बुकलेट में अतीत में भाजपा के साथ अपने रिश्तों पर सफाई भी पेश की है।

हालांकि राज्य के मुसलमानों के बीच मायावती अभी तक विश्वास पैदा नहीं कर पाई हैं। जबकि अभी तक उन्होंने 130 मुस्लिम उम्मीदवारों को विधानसभा चुनाव का टिकट दिया है। बसपा के प्रति मुसलमानों के विश्वास के संकट और कांग्रेस के उनके बीच सक्रिय होने से बसपा को मुस्लिम मतों के नुकसान का अंदेशा है। लिहाजा सपा के सबसे बड़े वोटबैंक को हिलाने की गरज से मायावती ने मुलायम के खिलाफ जारी बुकलेट को राज्य के हर मुस्लिम परिवार के बीच पहुंचाने का फरमान जारी किया है। इस किताब का कितना असर राज्य के मुस्लिम मतदाताओं के बीच होता है यह आने वाले वक्त में साफ हो जाएगा।

(ये लेखक के निजी विचार हैं, लेखक वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार हैं।)

narendra ver