नोटबंदी से देश का किसान 'बेहाल'

प्रधानमंत्री के नोटबंदी के ऐतिहासिक फैसले से सभी वर्ग के लोग प्रभावित हैं। ख़ासकर नोटबंदी की सीधी मार किसानों और गरीबों को झेलनी पड़ रही है।

नोटबंदी से देश का किसान

भारतीय किसान जहां लगातार तीन सालों से सुखे की मार झेल रहा था वहीं इस साल अच्छी बारिश के कारण किसान बहुत खुश थे आैर किसानों ने अच्छी फसल हाेने के आसार लगाए हुए थे। जिससे वह अपने तीन साल के नुकसान की भरपाई करने वाले थे, लेकिन 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी का फैसला लिया गया जिससे उनके सपनों पर पानी फिर गया।

नाेटबंदी के एलान के बाद 500 और 1000 के पुराने नोटों को पूरी तरह बैन कर दिया गया। जाे पूरे भारत में सर्कुलर करंसी थी। देश का कुल 86 प्रतिशत मुद्रा काे बैन कर दिया गया। नोटबंदी के अपने फैसले के बाद पीएम मोदी ने कहा कि यह देश से कालेधन आैर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए ये लिया गया एक अहम फैसला कारगर साबित होगा आैर इस फेसले से जनता काे थोड़ी परेशानी तो होगी।

पीएम मोदी के नोटबंदी के ऐतिहासिक फैसले से पूरे देश की जनता किस प्रकार प्रभावित हुई है यह सभी को मालूम है। नोटबंदी के कारण एटीएम आैर बैंकाें के बाहर कतारों में खड़े होने से अब तक 97 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं। वहीं, दिल्ली और मुंबई की चकाचौंध से बाहर निकल कर किसी ने नहीं देखा कि नोटबंदी के फैसले से गरीब किसानों पर क्या प्रभाव पड़ा है।

नोटबंदी से किसानों पर पड़े प्रभाव को जाननें के लिए नारदा न्यूज़ के एडिटर इन चीफ मैथ्यू सैमुअल और चीफ फोटोग्राफर विजय पांडे राजस्थान के अलवर जिले के बलाना गांव पहुंचे। यहां किसानों के उदास चेहरे देखने को मिले जो अपने खेतों में बैंगन, फूलगाेभी, प्याज, टमाटर, लोकी आैर गाजर उगाते हैं। यहां के किसान 20,000 रुपए का कर्ज लेकर प्रति बिगाह पट्टी की जमीन में सब्जी उगाते हैं, लेकिन नोटबंदी ने इन किसानों की सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

किसानों का मानना है कि नोटबंदी के फैसले ने उन्हें एक दशक पीछे ढकेल दिया है क्याेंकि नोटबंदी के फैसले से किसानों को उनकी सब्जियों के मुहं मांगें दाम नहीं मिल रहे हैं। जिसे वह खून-पसीना बहाकर उगाते हैं। मजबूरन किसानों को अपनी सब्जियों को फेंकना पड़ रहा है।

वहीं, बड़ी मुश्किल से किसानों को मेहनताना मिल पाता है, जिससे वह बीज की रकम की भी भरपाई नहीं कर पाते हैं। नाेटबंदी के बाद से ही सब्जियाें की किमताें में भारी गिरावट देखने काे मिल रही है। ऐसे में अलवर के किसान जो बैंगन 25 रुपए किलाे में बेचते थे अब 2 रुपए किलो में बेच रहे हैं। इसी वजह से किसान सब्जियों को बेचने की बजाय उन्हें सड़ने के लिए छाेड़ रहे हैं ताकि बाद में उस सड़ी हुई सब्जियाें काे खाद के रुप में इस्तेमाल कर सके।

नाेटबंदी के फैसले से जहां एक तरफ बैंकाें आैर एटीएम में लंबी कतार देखने काे मिल रही हैं। वहीं गरीब किसानाें पर तो मानों अापदा जेसी परिस्थिति आ गई है।

नोटबंदी से किसानों को हो रही परेशानी को जानें:-