नोटबंदी के मुद्दे पर बड़े आंदोलन की तैयारी में है विपक्ष- शरद यादव

नोटबंदी पर सरकार और विपक्ष में तकरार जारी है। अगर समय रहते सरकार ने नोटबंदी पर उचित फैसला नहीं लिया तो विपक्ष बड़े आंदोलन की तैयारी में है। नोटबंदी और इससे हो रही परेशानी के मुद्दे पर नारदा न्यूज ने जेडीयू नेता शरद यादव से खास बातचीत की।

नोटबंदी के मुद्दे पर बड़े आंदोलन की तैयारी में है विपक्ष- शरद यादव

नोटबंदी पर सरकार और विपक्ष में तकरार जारी है। अगर समय रहते सरकार ने नोटबंदी पर उचित फैसला नहीं लिया तो विपक्ष बड़े आंदोलन की तैयारी में है। नोटबंदी और इससे हो रही परेशानी के मुद्दे पर नारदा न्यूज ने जेडीयू नेता शरद यादव से खास बातचीत की। पेश है निधीष जे विलाट और शरद यादव के बीच बातचीत के मुख्य अंश

नोटबंदी की वजह से पूरा देश परेशान है, पूरा विपक्ष इस मुद्दे को उठा रहा है। लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री ने नोटबंदी का ये कहते हुए समर्थन किया है कि ये कालाधन के उपर प्रहार है। क्या जेडीयू के अंदर कुछ मतभेद चल रहा है।

कालाधन भारतीय अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। इसमे कोई शक नहीं है कि कालाधन के साम्राज्य का उखाड़ फेकना होगा। एक जिम्मेदार राजनीतिक दल होने के नाते जेडीयू कालेधन के खिलाफ की गई कार्रवाई में सरकार के साथ है। एक स्वस्थ और समतावादी अर्थव्यवस्था के लिए काले धन के खिलाफ लड़ाई बेहद जरुरी है।

आप मानते है कि कालाधन के खिलाफ लड़ाई में नोटबंदी कारगर साबित होगी ।

क्या आपको लगता है कि नोटबंदी  काले धन के खिलाफ लड़ाई में मदद कर रहा है। नोटबंदी से काला धन खत्म होगा या नहीं ये तो पता नहीं लेकिन इससे पूरा देश परेशान जरुर है। बैंकों और एटीएम के सामने लंबी लाईनें देखी जा रही हैं। नोटबंदी की वजह से कई मौतें हो चुकी हैं। मैं और मेरी पार्टी गरीबों की समस्याओं के प्रति फीक्रमंद है।

 किसानों की समस्याओं को आप हमेशा से उठाते रहे हैं। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक नोटबंदी से किसान बुरी तरह से परेशान है। क्या कहेंगे आप ?

आप ठीक कह रहे हैं। नोटबंदी से ग्रामीण भारत काफी प्रभावित हुआ है। खेती बारी और किसानी से जुड़े सारे काम बाधित हो रहे हैं। अगर ये कहा जाय कि नोटबंदी ने किसानों के काम को ठप कर दिया है तो गलत नहीं होगा। नोटबंदी गांवों में कई तरह की दिक्कतें पैदा कर रहा है।

पीएम मोदी नोटबंदी पर संसद में बहस के लिए तैयार नहीं है। आपको नहीं लगता कि ये संसदीय लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है?

पूरा विपक्ष नोटबंदी पर संसद में चर्चा की मांग कर रहा है। संसदीय लोकतंत्र में बहस जरुरी होता है। सरकार को विपक्ष की बातें सुननी चाहिए। प्रधानमंत्री जी को संसद को भरोसे में लेना चाहिए। लेकिन वो ऐसा कर नहीं रहे हैं। पीएम की ये सोच उनके तानाशाही रवैये को दर्शाता है।

पूरे देश में नोटबंदी से लोग परेशान है बावजूद इसके विपक्ष सड़कों पर नहीं उतर रहा। क्या विपक्ष पीएम मोदी से डरा हुआ है ?

किसी से डरने का सवाल ही नहीं उठता है। ये सही है कि लोग परेशान है लेकिन सड़कों पर कोई विरोध मार्च देखने को नहीं मिल रहा है। अगर किसी के घर में कोई बीमार है तो उसका ईलाज पहले जरुरी है। सभी लोग जरुरत की चीजे इक्टठा करने में लगे हैं। किसी के पास खाना नहीं है किसी को दवाईयां नहीं मिल रही है। ज्यादातर लोग लाईन में खड़े हैं। आप विपक्ष को दोष नहीं दे सकते हैं। विपक्ष वक्त का इंतजार कर रहा है अगर वक्त रहते सरकार ने करोड़ों लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया तो बहुत बड़ा आंदोलन होगा। पीएम मोदी को ये नहीं भुलना चाहिए भले ही वो सरकार में हो। अगर आकड़ों पर गौर करें तो टोटल वोट शेयर का 70 प्रतिशत विपक्ष में बंटा हुआ है। ऐसे में अगर पीएम मोदी विपक्ष की बात नहीं सुनते तो वो हिंदुस्तान के ज्यादातर लोगों की मांगों को दरकिनार कर रहे हैं। जो लोकतंत्र में ठीक नहीं है।

एक सांसद के रुप में आपने हमेशा जातिगत हिंसा और भेदभाव के मुद्दे को उठाया है क्या नोटबंदी का भी कोई जातीय एंगल भी है ?

ऐसे तो नोटबंदी से सभी जाति के लोग प्रभावित हुए हैं। लेकिन छोटी जाति के लोग जो कम पढ़े लिखे हैं और उनको बैंकिंग संशाधनों की ज्यादा जानकारी नहीं है। वो लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उनमे ज्यादातर लोग रोज कमाने खाने वाले हैं ऐसे में वो लोग कई दिन से बैंकों की लाईन में लगे हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनका क्या हाल होगा?