पायलट्स को आता है सुसाइड का ख्याल, नौकरी जाने के डर से नहीं करवाते डिप्रेशन का इलाज !

कमर्शियल फ्लाइट्स के सैकड़ों पायलट मेडिकल डिप्रेस्ड हैं लेकिन फिर भी नौकरी जाने के डर से वो अपना इलाज नहीं करवाते हैं। हार्वर्ड टीएच चेन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के रिसर्चर्स ने यह दावा किया है।

पायलट्स को आता है सुसाइड का ख्याल, नौकरी जाने के डर से नहीं करवाते डिप्रेशन का इलाज !

कमर्शियल फ्लाइट्स के सैकड़ों पायलट मेडिकल डिप्रेस्ड हैं लेकिन फिर भी नौकरी जाने के डर से वो अपना इलाज नहीं करवाते हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक हार्वर्ड टीएच चेन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के रिसर्चर्स ने यह दावा किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब डेढ़ साल पहले डिप्रेशन की वजह से एक को-पायलट ने जर्मनविंग्स एयरलाइन की फ्लाइट जानबूझकर फ्रेंच आल्प्स की चोटियों में क्रैश करा दिया था। इस हादसे मे 150 लोगों की मौत हुई थी।

इस हादसे के बाद प्रोफेसर जोसेफ एलन की टीम ने पायलट्स की दिमागी हालत का सर्वे करने का फैसला किया। इसके बाद 3 रिसर्चर्स की टीम ने अप्रैल से दिसंबर 2015 के बीच ऑनलाइन सर्वे किया। 3500 पायलट्स से संपर्क किया गया। पायलट्स को जवाब देने में हिचकिचाहट न हो, इसलिए उनके नाम नहीं पूछे गए।

वहीं सर्वे में अलग-अलग टॉपिक रखे गए थे। सभी से नॉर्मल और मेंटल हेल्थ से जुड़े सवाल पूछे गए। नॉर्मल सवालों के जवाब सभी पायलट्स ने दिए, लेकिन मेंटल हेल्थ से जुड़े सवालों के जवाब सिर्फ 1848 पायलट्स ने ही दिए।

यूसीएलए ब्रेन रिसर्च इन्स्टीट्यूट के प्रोफेसर डॉ. एंड्रयू एफ. ल्यूस्टर ने बताया कि डिप्रेस्ड लोगों में सुसाइड का ख्याल आना नैचुरल है। इसके साथ ही रिपोर्ट में दूसरे जॉब्स का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट्स के  मुताबिक 17% पुलिसवाले, 13% रिटायर्ड फौजी, 12% सैनिक और 7% इमरजेंसी सर्विस में रहने वाले मेडिकल कर्मचारी भी बेहद तनाव में रहते हैं।