दलितों के गांवों में राहुल गांधी

किसान यात्रा और खाट पंचायत के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के दलितों से सीधे बातचीत करेंगे। पार्टी नेता दलित शिक्षा-सुरक्षा-स्वाभिमान यात्रा के जरिए उत्तर प्रदेश के तीन हजार दलित बहुल गांवों में जाकर उनके बीच रहेंगे...

दलितों के गांवों में राहुल गांधी

नरेन्द्र कुमार वर्मा

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में उनके पास कोई करिश्माई दलित नेता नहीं है। लिहाजा वे स्वयं दलितों के बीच जाकर उनका पुरसाहाल लेते रहते हैं। राज्य में चुनावों की आमद है लिहाजा दलितों के साथ राब्ता कायम रखने के लिए कांग्रेस ने बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। पार्टी नेता पीएल पुनिया के नेतृत्व में राज्य के अस्सी जिलों में तीन हजार ऐसे गांवों को चिन्हित किया गया है जहां दलितों की आबादी सर्वाधिक है। कांग्रेसी नेता लगातार महीने भर इन गांवों में डेरा जमाए रखेंगे।

दलित परिवारों के बीच जाकर कांग्रेसी नेता उनके दुखदर्द को साझा करेंगे। पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की रणनीति यह हैं कि बसपा के खेमे से दलितों के एक हिस्से को वापस पार्टी की तरफ लाया जाए। वैसे प्रदेश के दलितों में सर्वाधिक आबादी जाटव वर्ग की है जो मायावती के साथ चट्टान की तरह खड़े है। जाटव से इतर दलित वर्ग में शामिल अन्य जातियों पर कांग्रेस सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है। इसी नीति के तहत कांग्रेस के नेता दलितों के बीच इस बात को प्रचारित करेंगे कि कांग्रेस ने उनके कल्याण की सर्वाधिक योजनाओं को लागू किया। विधानसभा चुनावों में सीधे दलितों की भागिदारी तय करने पर भी पार्टी गंभीरता से विचार कर रही है। इसके पीछे लक्ष्य यह बताना हैं कि बसपा उनका इस्तेमाल केवल वोटबैंक के तौर पर करती है जबकि कांग्रेस उन्हें राजनीतिक हिस्सेदारी देने में सबसे आगे है।

पूरे दिसंबर तक कांग्रेस का यह अभियान चलता रहेगा। इस दौरान नेता पूरा दिन दलितों के गांवों में उन्हीं के बीच बातचीत करते हुए बिताएंगे। मगर पार्टी के सामने फिलहाल सबसे बड़ी समस्या अपने दलित चेहरे को लेकर है। पीएल पुनिया को बसपा बाहरी बता कर प्रचार करती रही है। लिहाजा प्रदेश के ही दलित चेहरे की तलाश चल रही है। मिली जानकारी के मुताबिक पार्टी किसी दलित महिला को आगे कर सकती है। राहुल गांधी ऐसे कई नामों पर मंथन कर रहे हैं। दरअसल कांग्रेस की रणनीति हैं कि किसान यात्रा के बाद दलित बहुल गांवों में जोरदार तरीके से दस्तक दी जाए।

उत्तर प्रदेश में दलितों एक जमाने में कांग्रेस का परंपरागत वोटबैंक माना जाता था। मगर बसपा के उदय के बाद कांग्रेस का ग्राफ राज्य के दलितों के बीच से गिरता चला गया। हालांकि राहुल गांधी ने स्वयं पहल करके दलितों के बीच घुलने-मिलने का काम किया। दलितों के उत्पीड़न के दौरान भी वे दौड़कर उनके बीच पहुंचे। मगर पार्टी को चुनाव के वक्त उसका लाभ नहीं मिल पाया। राज्य के 49 जिलों में दलित मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। प्रदेश की 300 विधानसभा सीटों पर दलित मतदाता प्रभावी भूमिका निभाते हैं। एक जमाने में पार्टी महावीर प्रसाद और रामधन जैसे दलित नेता के सहारे प्रदेश में दलित समीकरणों को साधती थी मगर अब ऐसे नेता नहीं है।

(ये लेखक के निजी विचार हैंं, लेखक वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार हैं।)

narendra ver