RBI के ब्याज दर में बदलाव न करने के हो सकते है ये तीन कारण

आरबीआई ने बुधवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए फाइनैंशल मार्केट्स को चौंका दिया है। केंद्रीय बैंक ने अपनी पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा नीति में 6.25 फीसदी की ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया।

RBI के ब्याज दर में बदलाव न करने के हो सकते है ये तीन कारण

आरबीआई ने बुधवार को ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए फाइनैंशल मार्केट्स को चौंका दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने अपनी पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा नीति में 6.25 फीसदी की ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया।

वहीं इससे पहले देश के फाइनैंशल एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री के विशेषज्ञ यह अनुमान लगा रहे थे कि गवर्नर उर्जित पटेल नीतिगत दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती का एलान कर सकते हैं।

ब्याज दरों में बदलाव न होने के हो सकते है ये तीन कारण

मुद्रास्फीति

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने इस बात पर ध्यान दिया है कि गेहूं, चना और चीनी जैसी खाद्य वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही ओपेक ब्लॉक ने भी जनवरी से कच्चे तेल के उत्पादन में कमी करने का फैसला लिया है। वहीं ऐसे में आरबीआई यदि ब्याज दरों में कटौती का फैसला लेता तो महंगाई में और अधिक बढ़ोतरी हो सकती थी।

देखो और इंतजार करो की नीति

आरबीआई ने कहा है कि वह वेट ऐंड वॉच के मोड में है। ऐसा इसलिए क्योंकि नोटबंदी के फैसले के असर को देखने के लिए भी कुछ समय चाहिए। वहीं रिजर्व बैंक का अनुमान है कि इस फैसले से नकदी आधारित बिजनस जैसे रिटेल ट्रेड, होटल और रेस्तरां और परिवहन सेक्टर में कुछ समय के लिए कमजोरी का माहौल दिख सकता है। इसके साथ ही रिजर्व बैंक को विश्वास है कि आने वाले दिनों में नई करंसी नोटों का सर्कुलेशन तेज होगा और नॉन कैश बेस्ड पेमेंट्स की ओर बढ़ेंगे।

वैश्विक अनिश्चितता

आरबीआई का मानना है कि दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण इस साल की चौथी तिमाही में महंगाई का दबाव बन सकता है। वहीं वैश्विक व्यापार भी अब सुधार की तरफ है, जो जुलाई-अगस्त के दौरान अपने निचले स्तर की ओर चला गया था।

आरबीआई का कहना है कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई ने रफ्तार पकड़ी है, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में यह धीमी रही है। वहीं अमेरिका, जापान और चीन जैसे देश विकास के लिए महंगाई को बढ़ाने वाली नीति अपना सकते हैं।