खतरें में शीला की दावेदारी

राहुल गांधी अपनी सभाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाने के लिए जो दस्तावेज दिखा रहे हैं...

खतरें में शीला की दावेदारी

अपनी सभाओं में राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। राहुल ने अपने निशाने पर सिर्फ पीएम मोदी को ही नहीं रखा है बल्कि वो एक तीर से दो शिकार कर रहें हैं। बता दें कि पीएम पर आरोप लगाने के लिए राहुल जो दस्तावेज दिखा रहे हैं, उससे दोतरफा वार हो रहा है। जहां एक तरफ राहुल के आरोपों का असर पीएम मोदी पर हो रहा है वहीं दूसरी तरफ राहुल के वार से दिल्ली की पूर्व मंत्री शीला दीक्षित की दावेदारी भी खतरें में पड़ती नजर आ रही है।

बता दें कि राहुल ने जो दस्तावेज दिखाए हैंष उनमें कुछ नेताओं के नाम भी शामिल हैं जिसमें एक नाम शीला दीक्षित का भी है। जिसके बाद एक सवाल ये भी उठ रहा है कि अब शीला का क्या होगा। कांग्रेस नेताओं ने करीब एक महीने तक इन दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद इन्हें मुद्दा बनाने का फैसला किया है। तभी यह नहीं कहा जा सकता है कि उन्होंने 2013 में दिल्ली की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित का नाम उसमे नहीं देखा होगा। उनको इसका भी अंदाजा होगा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में विरोधी पार्टियां इसका इस्तेमाल कर सकती हैं। जिसके बाद शीला को कुर्बानी देनी पड़ सकती है।

गौरतलब है कि कांग्रेस के अंदर इस बात की चर्चा है कि शीला दीक्षित की दावेदारी अब नहीं रहने वाली है। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान ने समाजवादी पार्टी के साथ तालमेल करके चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है इसलिए अब उसे अपने दावेदार की जरूरत भी नहीं है। यह सब फैसला होने के बाद ही राहुल गांधी ने इन दस्तावेजों के हवाले से प्रधानमंत्री मोदी पर हमला किया। तभी यह भी कहा जा रहा है कि जल्दी ही उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी चुनाव पूर्व तालमेल का ऐलान कर सकती है।