सोली सोराबजी का सुप्रीम कोर्ट से सवाल, क्या ऐसे मामलों में पड़ना चाहिए ?

सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के ऑर्डर पर पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी ने सुप्रीम कोर्ट से सवाल किया है कि क्या ऐसे मामलों में पड़ना सही है...

सोली सोराबजी का सुप्रीम कोर्ट से सवाल, क्या ऐसे मामलों में पड़ना चाहिए ?

सिनेमाघरों में राष्ट्रगान चलाए जाने को लेकर कई तरह की बातें बनाई जा रही है और सभी इसमें अपनी अलग-अलग सोच व्यक्त कर रहे हैं। इसी बीच भारत के पूर्व एटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी ने सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने और सभी दर्शकों को इस दौरान खड़े होने को जरूरी बनाने के फैसले को न्यायपालिका का सीमा से बाहर जाना बताया है।

बता दें कि सोराबजी ने सुप्रीम कोर्ड के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मेरे हिसाब से ये फैसला कानूनी सीमाओं की अवज्ञा करके किया गया है। साथ ही सोराबजी ने ये भी उम्मीद जताई है कि सर्वोच्च अदालत अपने फैसले में संशोधन करेगी। 30 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ ने श्याम नारायण चौकसे की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फैसला दिया था। सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रगान बजाए जाने के दौरान सिनेमाघर के परदे पर राष्ट्रध्वज की तस्वीर भी दिखाए जाने का आदेश दिया है।

गौरतलब है कि सोराबजी ने अपनी बात साफ करते हुए कहा कि क्या ऐसे मामलों में पड़ना अदालत का काम है? क्या खड़े होना ही राष्ट्रगान के प्रति सम्मान दिखाने का एकमात्र तरीका है? हो सकता है कि कुछ लोग शारीरिक कारणों से न खड़े हो पाएं, कुछ लोग बौद्धिक या धार्मिक कारणों से न खड़े हों पाएं क्योंकि वो सचेत तौर पर ये मान सकते हैं कि उनके धार्मिक विश्वास उन्हें खड़े होने से रोकते हैं। दूसरी अहम बात ये है कि उन्होंने बिजोय इमैन्युअल केस का एक बार भी हवाला नहीं दिया है। बिल्कुल रेफर ही नहीं किया। न ही ये बताया कि ये आदेश कैसे लागू होगा? अगर कोई शारीरिक या किन्हीं अन्य कारणों से नहीं खड़ा हो पाता है तो इस पर कौन निगरानी रखेगा। और रही दरवाजे बंद करने की बात तो कोई इमरजेंसी आ गई तो क्या होगा? अगर किसी को तुरंत शौचालय जाना हो तो?

वहीं सोराबजी ने बताया कि इमैन्युअल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केरल के एक स्कूल में तीन बच्चों को राष्ट्रगान न गाने के लिए स्कूल से निकाले जाने को रद्द कर दिया था। इन बच्चों ने स्कूल प्रशासन से कहा था कि उनकी धार्मिक मान्यता राष्ट्रगान गाने की इजाजत नहीं देती। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रगान गाना बाध्यकारी नहीं है। सोराबजी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की मंशा “अच्छी” हो सकती है “लेकिन तरीका सही नहीं।