दिल्ली: रेहड़ी-पटरी वाले बोल रहे हैं, अब पेटीएम करो

नोटबंदी के बाद हाे रहे नकदी की समस्या से निपटने के लिए पुरानी दिल्ली के रेहड़ी पटरी वाले भी अब हाईटेक होने लगे हैं। वह मोबाइल फोन के जरिये ग्राहकों को भुगतान की सुविधा देने लगे हैं...

दिल्ली: रेहड़ी-पटरी वाले बोल रहे हैं, अब पेटीएम करो

नोटबंदी के बाद हाे रहे नकदी की समस्या से निपटने के लिए पुरानी दिल्ली के रेहड़ी पटरी वाले भी अब हाईटेक होने लगे हैं। वह मोबाइल फोन के जरिये ग्राहकों को भुगतान की सुविधा देने लगे हैं। ई-वॉलेट पेटीएम की सुविधा देने से उनका धंधा पटरी पर लौटने लगा है।

चांदनी चौक, खारी बावली, जामा मस्जिद, सदर बाजार समेत पुरानी दिल्ली के अन्य प्रमुख बाजारों में हजारों की संख्या में रेहड़ी पटरी वाले हैं, जो परंपरागत तरीके से ही धंधा कर अपने तथा अपने परिवार का पेट भरते हैं। इसमें खिलौने, चाय, जूस, पूड़ी सब्जी, छोले भटूरे समेत अन्य हैं। इनसे हजारों मजदूर भी जुड़े हैं जो सस्ते में खाना खाकर भूख मिटाते हैं तो चाय पीकर थकान मिटाते हैं। नोटबंदी के बाद 8 नवंबर से पूरी दिल्ली के साथ ही इनके सामने भी लेनदेन में नकदी की किल्लत पैदा हो गई। धंधा चौपट होने के कगार पर आ गया। कुछ दिन तो रेहड़ी पटरी वालों ने ऐसे ही दिन काटे, लेकिन जब उन्हें समझ में आ गया कि धंधे के लिए उन्हें भी लेन देन के लिए नए तौर तरीकों से लैस होना होगा तो वह भी उस तरफ कदम बढ़ा दिए हैं।

जामा मस्जिद के निकट न्यू सुभाष रोड के फुटपाथ पर जूस की दुकान लगाए राजकुमार ने मीडिया काे बताया कि मोबाइल से पेटीएम के द्वारा भुगतान की सुविधा देने से उनका धंधा पटरी पर लौटने लगा है, क्योंकि जिसके पास नकद है तो वह नकद दे दे रहा है बाकि जूस पीने वाले काफी लोगों के पास मोबाइल भुगतान की सुविधा है। उसके मुताबिक अब तक वह 50 फीसद तक धंधा पटरी पर ला पाया है। उनकाे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उसका धंधा सामान्य हो जाएगा। वहीं पर लालकिला के पास मोबाइल भुगतान की सुविधा देकर खिलौने बेच रहे अशफाक ने बताया कि इससे काफी फायदा मिला है। क्योंकि खरीदार भी अब नकद की समस्या से निपटने के लिए अन्य माध्यमों से भुगतान को तरजीह दे रहे हैं।