PM की तरह चाय बेचते थे तमिलनाडु के नए CM 'पन्‍नीरसेल्‍वम'

देश के प्रधानमंत्री मोदी की तरह तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वन भी चाय बेचते थे, पन्नीरसेल्वम ने अम्मा की फोटो हाथ में लेकर सीएम पद की शपथ ली।

PM की तरह चाय बेचते थे तमिलनाडु के नए CM

जयललिता के निधन के बाद उनके अत्‍यंत विश्वसनीय मंत्री ओ पन्‍नीरसेल्‍वम को अन्‍नाद्रमुक ने पार्टी का नया नेता सोमवार को ही चुन लिया गया था और बीती रात राज्‍यपाल सी.विद्यासागर राव ने मुख्‍यमंत्री के रूप में पन्नीरसेल्वम को पद एवं गोपनीयता की शपथ भी दिलाई।

पन्नीरसेल्वम ने जब मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली तब उनकी जेब में जयललिता की फोटो थी। पन्नीरसेल्वम ने नम आंखों से सीएम पद की शपथ ली। हालांकि इससे पहले पन्‍नीरसेल्‍वम 22 सितंबर से अनौपचारिक रूप से कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर रहे थे।

पन्नीरसेल्वम थेवर समुदाय से हैं और दो बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पन्‍नीरसेल्‍वम अपनी वफादारी वाली छवि की वजह से जाने जाते हैं। इससे पहले भी दो बार पन्‍नीरसेल्‍वम उस वक्‍त मुख्‍यमंत्री बने थे जब भ्रष्‍टाचार के मामलों के चलते जयललिता को पद से हटना पड़ा था।

पन्नीरसेल्वम का जन्म 14 जनवरी 1951 को पेरियाकुलम में हुआ था। 1970 में पन्नीरसेल्वम ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर एक चाय स्टॉल भी खोला था। बाद में अपने दोस्त की मदद में राजनीति में आए। पन्नीरसेल्वम वर्तमान में बोदिनायक्कनुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पेरियाकुलम नगरपालिका के चेयरमैन के तौर पर की थी। वह 1996 से 2001 तक इस पद पर बने रहे।

21 सितंबर 2001 को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद जयललिता को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था। तब पन्‍नीरसेल्‍वम ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता का कमान संभाली थी। उनका कार्यकाल 6 महीने का रहा। 21 सितंबर से 1 मार्च 2002 तक वो मुख्यमंत्री रहे।लेकिन फिर से  2002 में उपचुनाव जीतकर जयललिता मुख्यमंत्री बन गईं। पन्नीरसेल्वम 2 मार्च 2002 से 13 दिसंबर 2003 तक मंत्री पद पर रहे।

मई 2006 में हुए विधानसभा चुनाव में जयललिता की पार्टी AIADMK को हार मिली थी। करुणानिधि की पार्टी डीएमके ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। ऐसे में पन्नीरसेल्वम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे।

2011 में पन्नीरसेल्वम ने बोदिनायकनुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। बाद में उन्हें जयललिता के मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री के रूप में शामिल किया गया। वह 16 मई 2011 से 27 सितंबर 2014 तक वित्त मंत्री रहे।