भारत में स्टार्टअप्स की फंडिंग में भारी गिरावट

साल 2016 में भारत के स्टार्टअप जगत को 3.8 बिलियन डॉलर (करीब 25,777 करोड़ रुपये) का फंड मिला जबकि पिछले साल 2015 में यह रकम 7.6 बिलियन डॉलर (करीब 51,555 करोड़ रुपये) थी।

भारत में स्टार्टअप्स की फंडिंग में भारी गिरावट

इस साल स्टार्टअप्स की फंडिंग करीब-करीब आधी कम हो गई है। साल 2016 में भारत के स्टार्टअप जगत को 3.8 बिलियन डॉलर (करीब 25,777 करोड़ रुपये) का फंड मिला जबकि पिछले साल 2015 में यह रकम 7.6 बिलियन डॉलर (करीब 51,555 करोड़ रुपये) थी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दो साल के अभूतपूर्व उत्साह के बाद जोखिम उठानेवाले निवेशकों ने सावधानी के साथ कदम वापस ले लिया।

वहीं  आंकड़े बताते हैं कि 2015 में 9,462 से ज्यादा स्टार्टअप्स की स्थापना हुई थी जिनमें गैर-तकनीकी क्षेत्र में काम करनेवाली कंपनियां भी शामिल हैं, वहीं इस साल महज 3,029 स्टार्टअप्स ही शुरू हो पाए।

दरअसल, स्टार्टअप्स फंडिंग में मंदी का माहौल वैश्विक स्तर पर देखा जा रहा है। टेक्नॉलजी फंडिंग में कमी आने की वजह से तेजी से बढ़ रहे स्टार्टअप्स का वैल्युएशन कम हो रहा है। पिछले साल बंद होनेवाले स्टार्टअप्स की तादाद बढ़कर 212 तक पहुंच गई। हालांकि, फंडिंग के लिए बातचीत और समझौते पिछले साल से भी ज्यादा हुए। आंकड़े के मुताबिक, इस साल 1,031 फंडिग डील्स हुए जो पिछले साल 1,024 ही हुए थे।

इंडियन एंजल नेटवर्क (आईएएन) की प्रेजिडेंट पद्मजा रूपारेला ने फंडिंग में गिरावट का जिम्मेदार फंड जुटाने में बड़ी स्टार्टअप्स (1 बिलियन डॉलर वैल्युएशन वाले) की असफलता को मानती हैं। आईएएन इस साल 36 राउंड की फंडिंग के साथ सबसे सक्रिय निवेशक के रूप में उभरा। पद्मजा ने कहा, 'पिछले साल बहुत प्रचार-प्रसार हुआ था जिसमें अब थोड़ी कमी आ गई। इस साल हमें थोड़े ज्यादा कमिटेड आंट्रप्रन्योर्स देखने को मिले।'

रूपारेल ने बताया, 'फ्लिपकार्ट, क्विकर, ग्रॉफर्स जैसे बड़े स्टार्टअप्स, जिन्होंने पिछले साल कई बार फंडिंग जुटाई थी, वो इस साल फिर से पूंजी नहीं जुटा पाए। टॉप टेन टेक्नॉलजी डील में आईबीबो ग्रुप और मेकमायट्रिप का विलय, यात्रा (नैस्डेक लिस्टेड टेरापिन द्वारा अधिग्रहित) और बुकमायशो व हाइक द्वारा की गई फंड रेजिंग शामिल है। हालांकि कुल फंडिक काफी कमजोर रही है लेकिन शुरुआती स्टेज की डील्स में कोई स्लोडाउन देखने को नहीं मिला है।'

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में सभी बड़े कैपिटल फंड वेंचर जो अकेले स्टार्टअप में 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा इन्वेस्ट करते हैं, वह इस साल कुछ चयनित कंपनियों में ही निवेश कर रहे हैं। न्यू यॉर्क की टाइगर ग्लोबल जिसने पिछले साल 30 से ज्यादा निवेश किए थे, वह लगभग भारत से जा चुकी है। इस कंपनी ने इस साल भारत में एक भी निवेश नहीं किया है।