कैशलेस हिंदुस्तान के सपने का 'गोरा' सच

नोटबंदी के बाद से कैशलेस हिंदुस्तान के सपने देखे जा रहे है।पीएम मोदी की अगुवाई वाली सरकार देश को कैशलेस इकॉनमी की दिशा में ले जाना चाह रही है। लेकिन क्या हिंदुस्तान इसके लिए तैयार है। क्या रुरल इंडिया कैशलेस इकॉनमी के साथ चल सकता है। नारदा न्यूज ने की है पड़ताल

कैशलेस हिंदुस्तान के सपने का

पूरे देश को कैशलेस बनाने की बात की जा रही है। कहा जा रहा है कि देश उस दिशा में आगे बढ़ रहा है जहां सिर्फ प्लास्टिक मनी होगी। यानी कोई नोट नहीं होगा कोई सिक्का नहीं होगा। लेकिन कैसे मुमकिन है उस देश को कैशलेस बनाना जहां एक बड़ी आबादी पढ़ना-लिखना ही न जानती हो। बिहार के मोतिहारी का एक गांव ऐसा भी है जहां के ज्यादातर लोगों को अभी तक एटीएम कार्ड कैसा होता है ये भी नहीं पता है। ये तो एक गांव की बात है देश कमें ऐसे हजारों गांव है जहां लोगों को एटीएम के बारे में पता नहीं है। रूरल हिंदुस्तान में रहने वाली बड़ी आबादी ऐसी भी है जिन्होने एटीएम कार्ड देखा तक नहीं है।

रूरल इंडिया में डिजिटल लिटरेसी का बुरा हाल है



सरकार अब नोट छोड़ कार्ड के जरिए, इंटरनेट के जरिए बाजार से सामान खरीदने की बात कह रही है. जाहिर है ऐसी बातें उन लोगों को चिंता में डालती हैं जो इन मामलों की बुनियादी समझ भी नहीं रखते हैं. जाहिर है डिजिटल इंडिया तभी बन पाएगा जब देश में डिजिटल लिटरेसी होगी यानी लोग डिजिटल साक्षर होंगे।कहावत है कि कैश इज किंग, लेकिन क्या कैश का शासन खत्म होने जा रहा है। नोटबंदी का लक्ष्य था तो काले धन को पकड़ना। लेकिन इसका बड़ा साइड इफेक्ट है कि सिस्टम में कैश मिलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में सरकार कैशलेस पेमेंट यानि कार्ड या मोबाइल या कम्प्यूटर से पेमेंट करने के तरीकों को बढ़ावा देना चाहती है। इसके लिये वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कई एलान किए है। पेट्रोल डी़जल भरवाना, ट्रेन टिकट बुक करवाना, बीमा खरीदना, सब चीजों पर डिस्काउंट मिलेगा। लेकिन शर्त ये है कि इनकी पेमेंट डिजिटल की गई हो। लेकिन ये सारे एलान इस वक्त सरकारी क्षेत्र की कुछ कंपनियों के लिए है।

कैशलेस लेनदेने के जरिए 24 घंटे कहीं से भी, किसी को भी पेमेंट किया जा सकता है। इससे डिजिटल लेनदेन सहूलियत भरा होता है और पैसे का हिसाब रखना आसान होता है। इससे टैक्स चोरी रोकने में मदद मिलेगी और जवाबदेही होगी, इकोनॉमी को फायदा को फायदा होगा। आतंकवाद और टेररफंडिंग पर लगाम लगेगी। नकदी की लागत जीडीपी के 1.7 फीसदी से घटकर 1.3 फीसदी संभव हो सकती है। 2024-25 तक 4 लाख करोड़ रुपये की बचत संभव है।

बैंकिंग सेक्टर के सामने चुनौतियां

बैंकिंग सेक्टर के सामने कई चुनौतियां उभर कर आ रही है जिसमें 23.3 करोड़ लोगों के पास बैंक खाता नहीं है। करीब 90 फीसदी रोजगार असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे है।सरकार की कैशलेस लेनदेने में डिजिटल पेमेंट की भी कई चुनौतियां सामने आई है। कैशलेस होने के लिए अच्छी रफ्तार वाला इंटरनेट का होना बेहद जरुरी है। नई टेक्नोलॉजी में लगातार निवेश करना जरुरी है। साथ ही डिजिटल पेमेंट पर रियायत मिले। लेकिन गांवों तक टेक्नोलॉजी की पहुंच नहीं है। लोगों को टेक्नोलॉजी की समझ कम है। जिसके चलते ऑनलाइन पेमेंट में फ्रॉड के खतरे भी कई है। हालांकि डिजिटल पेमेंट के कई तरीके है जिसके तहत मोबाइल पेमेंट वॉलेट, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस, ऑनलाइन बैंकिंग, डेबिट, क्रेडिट कार्ड के जरिए डिजिटल पेमेंट कर सकते है।



मोबाइल पेमेंट वॉलेट का इस्तेमाल

मोबाइल पेमेंट वॉलेट तीन तरह के होते है। क्लोज्ड, सेमी-क्लोज्ड, ओपन। सेमी क्लोज्ड सबसे लोकप्रिय है। इसके तहत पेटीएम, फ्रीचार्ज, मोबीक्विक सेमी क्लोज्ड वॉलेट के जरिए किए जा सकते है। जिसमें अलग-अलग सामान, सर्विस का भुगतान किया जा सकता है। पेमेंट वॉलेट से ऑनलाइन शॉपिंग की जा सकती है। वोडाफोन एम-पैसा ओपन वॉलेट के जरिए कर सकते है। एम-पैसा से पैसे निकाल सकते हैं।

यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानि यूपीआई के तहत मोबाइल के जरिए पैसे का लेनदेन किया जाता है। इसमें वर्चुअल मोबाइल एड्रेस का इस्तेमाल कर मोबाइल नंबर या आधार के जरिए लेनदेन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसमें लेनदार के बैंक अकाउंट की जरूरत नहीं होती है। लेनदेन का बेहद सुरक्षित तरीका है और अब तक 23 बैंकों में यूपीआई की सुविधा शुरु की है।

डेबिट/क्रेडिट कार्ड के जरिए स्वाइप मशीन पर पेमेंट की सुविधा, एटीएम  से कैश निकालने की सुविधा, ऑनलाइन शॉपिंग की सुविधा और पीओएस से भी 2000 कैश निकाल सकते हैं।

103 करोड़ लोग कर रहे हैं मोबाइल फोन का इस्तेमाल

टेलीकॉम मंत्रालय के आकंडो के मुताबिक मोबाइल फोन का इस्तेमाल 103 करोड़ लोग करते है। उसमें भी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वाले संख्या 35 करोड़ की है। अब तक आधार कार्ड 108 करोड़ लोगों के पास है वहीं 50 करोड़ की आबादी के पास इंटरनेट कनेक्शन मौजूद है। वहीं 2016 में आरबीआई के आकंड़ो की बात की जाएं तो 2.02 लाख कुल एटीएम है। जिसमें पीओएस 14.61 लाख है।

देश मे 50 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन है

भारत में करीब 50 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन है। जिसमें से देश की 35 फीसदी आबादी के पास इंटरनेट है। शहर में 53 फीसदी लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा है तो गांवों में सिर्फ 9 फीसदी लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा है।

डिजिटल ट्रांजेक्शन में इजाफा



टेलीकॉम मंत्रालय के आकंडों पर नजर डाले तो नोटबंदी की घोषणा किए जाने के बाद 8 नवंबर से अब तक डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ौतरी हुई है। पहले जहां 17 लाख लोगों ने डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल किय़ा था वह अब 63 लाख लोगों की संख्या तक पहुंच गया है। 8 नवंबर तक यूपीआई के जरिए लेनदेने की प्रक्रिया का इस्तेमाल 3721 से बढ़कर 48,238 तक के आकंड़ो पर पहुंच गया है। पीओएस में 8 नवंबर 50.2 लाख था जो अब तक 98.1 करोड़ लगाया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों की कुल जनसंख्या 62.9 करोड़ है और कुल आबादी में हिस्सा 81 फीसदी हिस्सा है। दिसंबर 2015 तक बिना बैंक वाले ग्रामीण क्षेत्र 93 फीसदी है। वहीं एक लाख लोगों पर ब्रांच 5.71 है।

लोगों की कैश की आदत छुड़वाने के लिए निजी क्षेत्र को भी कैशलेस पेमेंट आकर्षक बनाने होंगे। कम कैश का इस्तेमाल इकोनोमी के लिए अच्छा रहेगा। लेकिन क्या हम इसके लिए तैयार है। इन सब के बावजूद क्या हमारा सिस्टम, इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है। क्या हम कैश का मोह छोड़ने को तैयार है और क्या कैशलेस बनने के लिए नोटबंदी की जरूरत थी।

गोवा बनेगा पहला कैशलेस स्टेट

गोवा 31 दिसंबर से देश का पहला  कैशलेश स्टेट बनने जा रहा है. अब लोग सिर्फ मोबाइल का एक बटन दबाकर अपनी आवश्यकताओं की चीजें बाजार से खरीदकर ला सकते हैं. गोवा में लोगों को अब अपने पास पर्स रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी. लेन-देन मोबाइल से होगा. खरीद का पैसा लोगों के खाते से डेबिट हो जाएगा।लेन-देन के लिए लोगों को अपने मोबाइल से *99# डायल करना होगा, इसके लिए स्मार्टफोन का होना आवश्यक नहीं है. *99# डायल करने के बाद लेन-देन पूरी करने के लिए निर्देश फॉलो करने होंगे. ये व्यवस्था उन वैंडर्स के यहां की गई है, जिनके पास स्वाइप मशीन नहीं है. बाकी एटीएम और क्रेडिट कार्ड से भी पेमेंट जारी रहेगा। नकदरहित लेन-देन कैसे हो इसके लिए 31 दिसंबर से पहले जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे. गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस संबंध में राज्य के शीर्ष नौकरशाहों के साथ एक बैठक भी की।पर्रिकर ने एक रैली में कहा कि कैशलैस समाज हो, ऐसा पीएम मोदी का सपना है. अब ऐसा करने वाला गोवा पहला राज्य होगा।

कैशलेस ट्रांजेक्शन पर जोर

नोटबंदी के फैसले के बाद केंद्र सरकार अब गांव लेवल तक कैशलेस ट्रांजेक्शन पर जोर दे रही है। इसके लिए केंद्र व राज्य शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने वाले करोड़ों हितग्राहियों को डेबिट कार्ड जारी किए जाने की तैयारी है। इतना ही नहीं देश के सभी गांवों में कैंपेन चलाया जाएगा। गांव के लोगों को कैशलेस ट्रांजेक्शन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी, मनरेगा के मजदूर, पेंशनधारी व अन्य योजनाओं के हितग्राही, कर्मचारी आदि डेबिट कार्ड के जरिए कैशलेस ट्रांजेक्शन कर सकें।

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