ट्रेन की चपेट में आने से 18 गायाें की माैत, पटरी खून से लाल

राजस्थान के पीपलाज रेलवे स्टेशन के निकट चल रहे रेलवे के फोर लेन काम के लिए पटरीयों के लिए की गई बेरीकेटींग में फसने से बीते रविवार रात को ट्रेन की चपेट आने से करीब 18 गायों व बछड़ों की मौत हो गई।

ट्रेन की चपेट में आने से 18 गायाें की माैत, पटरी खून से लाल

राजस्थान में पीपलाज रेलवे स्टेशन के निकट चल रहे रेलवे के फोर लेन के काम के पास पटरीयों के लिए की गई बेरीकेटींग में फसने से  बीते रविवार रात को ट्रेन की चपेट आने से करीब 18 गाये व बछड़ों की मौत हो गई। रात में मौके पर पहुंचे हिन्दू संगठनों के लोगों ने घटना को लेकर नाराजगी जताई।

मीडिया  रिपाेर्ट के मुताबिक इस घटना के बाद रविवार को सुबह उपखण्ड अधिकारी सुरेश चावला व तहसीलदार हरिसिंह शेखावत मौके पर पहुंचे। घटना स्थन पर पर पहुंच कर उपखण्ड चावला ने घटना का जायजा लिया व स्टैशन मास्टर से घटना के बारे में पूछा। उपखण्ड अधिकारी चावला ने सरपंच को मौके पर बुलवा कर मुर्त गाये व बछड़ों को दफनाने की व्यवस्था करवाई।
दूसरे क्षेत्र की थी गाये

प्रत्यक्षदर्शियों ने उपखण्ड अधिकारी चावला को मौके पर बताया कि दूसरे गांवों के लोग लावारिश पशुओं को लेकर दुसरे स्थान पर छोडऩे को लेकर जा रहे थे। रेलवे लाइन के लिए बने रास्ते से गुजरते वक्त चालू लाइन की पटरीयों के लिए की गई बेरीकेटींग से गाये गुजर रही थी। रात साढे 8 बाजे अजमेर की और से पेसेंजर ट्रेन आने पर उसकी चपेट में आई गाये व बछड़ों की मौके पर मौत हो गई।

घटना स्थल पर करीब तीन सो मीटर तक की दोनों पटरीया खून से लाल हो गई। पटरीया लाल होने के साथ ही पटरीयों के आस-पास पशुओं के अंगों के टुकड़े फेल गए। ग्राम पंचायत ने घटना स्थन से मुर्त गायों व बछड़ों को उटवाया।

पीपलाज रेलवे स्टैशन के पास पेसेंजर ट्रेन की चपेट में पशु आने के बाद ट्रेन को आधा घंटा घटना स्थल के पास रूकना पड़ा। पीपलाज स्टेशन मास्टर समीर कश्यप ने बताया कि रात साढे आठ बजे अजमेर-दादर पेसेंजर ट्रेन की चपेट में पशु आए थे। घटना के बाद कार्रवाई के लिए ट्रेन को आधा घंटा घटना स्थल पर रूकना पड़ा।

पीपलाज के पास रेलवे के फोर लेन के लिए चल रहे काम के कारण पटरीयों की बेरीकेटींग की हुई है। बेरीकेटींग भी जमीन में मजबूत पीलर लगाने के बाद कटीले तार व सरिये लगाए हुए है। इससे घटना के दौरान ट्रेन आने पर गायों में भगदड़ मच गई व भाग नहीं पाई। इससे तेज गति से आ रही ट्रेन की चपेट से गाये बच नहीं पाई। और चपेट में आई गायों के परखचे उड़ गए।