भारत में नोटबंदी के पीछे अमेरिका का हाथ: जर्मन अर्थशास्त्री

भारत में नोटबंदी का फैसला को लेकर चौंका देने वाला मामला सामने आया है। इस नोटबंदी के फैसले के पीछे अमेरिका का हाथ बताया जा रहा है। एक लेख में जर्मन अर्थशास्त्री नॉर्बर्ट हैरिंग ने यह दावा किया है।

भारत में नोटबंदी के पीछे अमेरिका का हाथ: जर्मन अर्थशास्त्री

भारत में नोटबंदी का फैसला को लेकर चौंका देने वाला मामला सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक नोटबंदी के इस फैसले के पीछे अमेरिका का हाथ है। एक लेख में जर्मन अर्थशास्त्री नॉर्बर्ट हैरिंग ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ बेहतर विदेश नीतियों को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सामरिक साझेदारी की घोषणा की थी। इस साझेदारी के बारे में अमेरिकी सरकार की विकास एजेंसी यूएसएआईडी ने भारतीय वित्त मंत्रालय के साथ सहयोग समझौतों पर बातचीत की थी। इसमें एक मकसद यह भी था कि भारत और वैश्विक स्तर पर नकदी को पीछे कर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा।

जर्मन अर्थशास्त्री नॉर्बर्ट हैरिंग



जर्मन अर्थशास्त्री नॉर्बर्ट हैरिंग ने कहा कि नोटबंदी फैसले के चार हफ्ते पहले यूएसएआईडी ने कैटलिस्ट नाम की स्कीम शुरू की थी, जिसका मकसद भारत में कैशलेस पेमेंट्स को बढ़ावा देना था। 14 अक्टूबर की प्रेस स्टेटमेंट कहती है कि कैटलिस्ट यूएसएआईडी और वित्त मंत्रालय की बीच साझेदारी का अगला दौर है। लेकिन अब यूएसएआईडी की वेबसाइट पर मौजूद प्रेस रिलीज में यह स्टेटमेंट अब दिखाई नहीं देता है। उन्होंने कहा कि कैटलिस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आलोक गुप्ता हैं जो वॉशिंगटन के वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टिट्यूट के सीओओ रहे हैं। वह उस टीम का हिस्सा भी रहे हैं, जिन्होंने भारत में आधार सिस्टम को डिवेलप किया है।

मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक स्नैपडील के पूर्व वाइस प्रेजिडेंट बादल मलिक को कैटलिस्ट का सीईओ बनाया गया है। उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि कैटलिस्ट का मिशन कम आय वाले ग्राहकों और मर्चेंट्स के बीच डिजिटल पेमेंट्स में आने वाली समस्याओं को दूर करना है। हम एक स्थायी मॉडल बनाना चाहते हैं, लेकिन सरकार को भी इसके लिए काम करना होगा। मलिक ने सभी समस्याओं के बारे जो बताया था उनकी यूएसएआईडी की 2015 में आई रिपोर्ट में समीक्षा की गई थी।