सपा-कांग्रेस गठबंधन ने बिगाड़ा मायावती का खेल, हाथी पर सवार होंगे अंसारी बंधु

सपा-कांग्रेस गठबंधन ने मायावती का खेल खराब कर दिया है। खबर है कि अंसारी बंधु हाथी पर सवार हो रहे है। सूत्रों की माने तो बीएसपी और अंसारी बंधुओं में चार सीट पर डील तय हुई है।

सपा-कांग्रेस गठबंधन ने बिगाड़ा मायावती का खेल, हाथी पर सवार होंगे अंसारी बंधु

अखिलेश के दरवाजे से खाली हाथ लौटने के बाद यूपी में कौमी एकता दल के अंसारी बंधु बीएसपी के संपर्क में हैं. सूत्रों के मुताबिक बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल और बेटे को बीएसपी से टिकट मिल सकता है।

सूत्रों की माने तो संतीश चंद्र मिश्रा और अंसारी बंधुओं के बीच बातचीत आखिरी चरण में हैं. इस बीच खबर है कि मऊ और मोहम्मदाबाद से बीएसपी ने सभी प्रत्याशियों को हटा लिया है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक मुख़्तार और उनके भाई शिबगतुल्लाह अंसारी और मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी को बीएसपी टिकट दे सकती है.

सूत्रों के हवाले से खबर है कि मऊ सदर सीट से अब बीएसपी के मनोज राय की जगह मुख्तार अंसारी लड़ेंगे. घोसी से इकबाल अहमद की जगह मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी चुनाव लड़ेंगे. मोहम्मदाबाद से विनोद राय को हटाकर शिबगतुल्लाह अंसारी को टिकट दिया जाएगा.

आपको बता दें कि अखिलेश यादव की तरफ से मऊ सीट से अल्ताफ अंसारी को टिकट दे दिया. अभी मुख्तार अंसारी इस सीट से विधायक हैं. इसके बाद ही आशंका जताई जाने लगी थी कि अंसारी बंधुओं में से किसी को भी समाजवादी पार्टी अपने साथ नहीं रखेगी.

बीएसपी में बगावत के सुर!
मोहम्मदाबाद से बीएसपी प्रत्याशी विनोद राय को टिकट मिली थी. फिलहाल पार्टी ने इस से टिकट वापस ले लिया है.  जिसकके बाद से विनोद राय नाराज बताए जा रहे हैं।  खबरों के मुताबिक मंगलवार को मायावती ने विनोद राय को बुलाया था और कहा था कि इस समय स्थिति थोड़ी खराब है. सपा और कांग्रेस के गठबंधन से अल्पसंख्यक वोट उधर जा रहा है. इसलिए हमें उनका जवाब देना है। इसी बीच खबर  ये भी है कि अगर बीएसपी मोहम्मदाबाद सीट पर शिबगतुल्ला को टिकट देती है तो विनोद राय बगावती सुर अपना सकते हैं। सूत्रों  की माने तो बीएसपी और अंसारी बंधुओं में चार सीट पर डील तय हुई है.

अंसारी बंधुओं का कितना प्रभाव?
बलिया, मऊ, गाजीपुर इसके साथ ही वाराणसी की कुछ सीटों पर अंसारी बंधुओं का दबदवा है. कुल मिलाकर पंद्रह से बीस सीट पर अंसारी बंधुओं की पकड़ मानी जाती है. समाजवादी पार्टी के कुछ नेता भी इस बात को मानते हैं कि अंसारी बंधुओं का उनके साथ रहना फायदे का सौदा है. लेकिन अखिलेश यादव अपनी एक अलग छवि बनाने की कोशिश में हैं इसी लिए अंसारी बंधुओं को पार्टी में जगह नहीं मिल पायी.

सपा में अब अंसारी बंधुओं के लिए कुछ नहीं!
विलय के बाद भी मुख्तार अंसारी से जुड़े किसी भी नेता को समाजवादी पार्टी ने टिक नहीं मिला है. आपको याद दिला दें कि पिछले दिनों जब समाजवादी पार्टी में मुलायम और शिवपाल यादव का जमाना था तब मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का विलय हुआ था. लेकिन अब समाजवादी पार्टी में बहुत कुछ बदल चुका है, अब अखिलेश यादव के हाथ में पार्टी है इसलिए मुख्तार के लिए कोई जगह नहीं है।