यूपी: भाजपा में बाहरी नेताओं के लिए एंट्री पर भारी रोष, कार्यकर्ता ने खून से लिखा पत्र

यूपी चुनाव काे लेकर टिकट बंटने से पहले ही उत्तर प्रदेश बीजेपी में अंदरूनी कलह और बाहरी नेताओं को पार्टी में शामिल किए जाने का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। यही वजह है कि राजधानी लखनऊ के एक कार्यकर्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से पत्र लिखा है और कई अहम सवाल उठाए है।

यूपी: भाजपा में बाहरी नेताओं के लिए एंट्री पर भारी रोष, कार्यकर्ता ने खून से लिखा पत्र

यूपी चुनाव काे लेकर टिकट बंटने से पहले ही उत्तर प्रदेश बीजेपी में अंदरूनी कलह और बाहरी नेताओं को पार्टी में शामिल किए जाने का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। दरअसल चुनाव से पहले विभिन्न दलों के 50 से ज्यादा नेताओं का बीजेपी में शामिल होना पिछले कई दशकों से पार्टी के लिए जी जान से जुटे कार्यकर्ताओं और नेताओं को रास नहीं आ रहा है।

मकरसंक्रांति के बाद भाजपा अपनी पहली सूची जारी करेगी ऐसे में उन कार्यकर्ताओं को लगने लगा है कि बाहरी की वजह से कहीं उनकी उपेक्षा न हो जाए। यही वजह है कि राजधानी लखनऊ के एक कार्यकर्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से पत्र लिखा है और कई अहम सवाल उठाए है। इतना ही नहीं बताया जा रहा है कि प्रदेश भर से कार्यकर्ता बाहरी नेताओं की पार्टी में एंट्री को लेकर दिल्ली बीजेपी कार्यालय में ऐसे ही पत्र भेज रहे हैं।

मीडिया रिपाेर्टस के मुताबिक बीजेपी कार्यकर्ता अनूप कुमार वाजपेयी ने अपने पत्र में लिखा है कि वह बाल्यकाल से ही बीजेपी और उसकी विचारधारा से जुड़ा हुआ है। अनूप का कहना है कि पार्टी की संख्या जब दो रही हो या दो सौ पार्टी के सभी कार्यकर्ता जी जान से साथ रहे। 2014 में जिन कार्यकर्ताओं की मेहनत की बदौलत लोकसभा चुनावों में सफलता मिली क्या उन्हीं कार्यकर्ताओं से वह विश्वास 2017 आते-आते ख़त्म हो गया।

अनूप ने पूछा है कि विपक्ष के वे नेता जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी को पानी पी-पीकर गाली देते थे और पार्टी को साम्प्रदायीक बताते थे वे अब धर्मनिपेक्ष कैसे हो गए? अनूप ने साफ़ साफ कहा कि हम दूसरे दलों के नेताओं को क्यों अपना सिरमौर बना रहे हैं जबकि कार्यकर्ताओं की संख्या बल की बात करें तो हमारी संख्या 11 करोड़ है।

आप काे बता दें कि बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाहरी नेताओं को टिकट बांटने को लेकर होगी। बताया जा रहा है कि पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी पार्टी को चुनाव काफी नुकसान करा सकती है।