CISF जवान की पत्नि ने लगाया आराेप- अधिकारी मेरे पति को पागल करवा देने की साजिश कर रहे हैं

सीआईएसएफ जवान की पत्नि का आराेप है कि अधिकारी उसके पति काे पागल करार देने की कोशिश में लगे है। स्नेहलता ने सीआईएसएफ के डिप्टी कमांडेंट एसपी खिलोरे के खिलाफ उनके पति को पीटने और फिर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

CISF जवान की पत्नि ने लगाया आराेप- अधिकारी मेरे पति को पागल करवा देने की साजिश कर रहे हैं

बीएसएफ के जवान का अपने अधिकारियों के अमानवीय रवैये वाला वीडियो वायरल होने के बाद लगातार इस तरह की शिकायतों के आने का सिलसिला शुरु हो गया है। और अब इस फेहरिश्त में नाम जुड़ा है मध्यप्रदेश के खरगौन जिले में बडवाह के सीआईएसएफ के रीजनल ट्रेनिंग सेंटर का। जहां सीआईएसएफ के एक जवान की पत्नी ने प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति तक से अपने पति पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिये न्याय की गुहार लगाई है। स्नेहलता यादव के पति अमरदीप यादव सीआईएसएफ में एएसआई हैं। स्नेहलता अपने पति के लिये फोर्स के अधिकारियों के खिलाफ कमर कसकर खड़ी हुई हैं। स्नेहलता ने सीआईएसएफ के डिप्टी कमांडेंट एसपी खिलोरे के खिलाफ उनके पति को पीटने और फिर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। स्नेहलता की मानें तो उनके पति को डिप्टी कमांडेंट ने ड्यूटी के दौरान ही इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि उनके कान से खून बहने लग गया। इतना ही नहीं इसकी शिकायत करने पर पूरे परिवार पर मानों वज्रपात हो गया।

स्नेहलता ने कहा, मेरे पति मुंबई एअरपोर्ट पर ड्यूटी कर रहे थे। चारों तरफ से एसी की गर्म हवा आ रही थी, सांस लेना मुश्किल था। उनकी तबीयत खराब होने लगी तो वो पास रखी कुर्सी पर बैठ गये। इस पर वहां से गुजर रहे डिप्टी कमांडेंट एसपी खिलोरे नें उन्हे जोर से चांटा मार दिया। जिससे उनके कान से खून बहने लगा। स्नेहलता के मुताबिक उनके पति पूरी निष्ठा के साथ अपनी ड्यूटी को अंजाम देते थे। मगर 1 मई 2016 को ड्यूटी पर उनका स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद वो कुछ देर के लिये कुर्सी पर बैठ गये थे। जिसके लिये उनकी पिटाई की गई। इसकी शिकायत करने वे तत्काल एडीजी के पास गये। मगर बीच में ही उन्हे पकड़कर बैरक में बंद कर दिया गया। उत्तर प्रदेश के इटावा के रहनें वाले अमरदीप की सन 2000 में सीआईएसएफ में नौकरी लगी थी। 2013 जुलाई में उनकी ड्यूटी मुंबई के छत्रपति शिवाजी एअरपोर्ट पर लगा दी गई।

स्नेहलता ने कहा, ‘मेरे पति एडीजी से शिकायत करने जाने लगे तो उन्हें बैरक में बंद कर दिया गया। उन्होनें इसकी लिखित शिकायत उच्च अधिकारियों से कर दी। जिसके बाद उन्हे पागल करार देने की कोशिश की जाने लगी। अधिकारी उन्हें मुंबई में मनोचिक्तसक के पास अस्पताल में भर्ती करवानें ले गये। मगर डॉक्टर नें उन्हे स्वस्थ घोषित करके घर भेज दिया।

‘ स्नेहलता की मानें तो उनके पति को पागल करार करवा देने तक की साजिश रची गई। दो बार रुल37 के तहत 5-5 दिन का वेतन काटा गया। मगर उन्होंने शिकायत करना जारी रखा। इस पर रुल 36 के तहत अनुशासनहीनता का केस दर्ज कर चार्जशीट दाखिल कर दी गई। जिसके बाद वे मुंबई पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने भी गये। मगर पुलिस ने आवेदन लेकर उन्हें भगा दिया।

स्नेहलता ने कहा, ‘रुल37 में बार-बार सजा देते रहे। पुलिस के पास गये मगर पुलिस नें शिकायत दर्ज नहीं की। पुलिस में जाने का पता चलते ही अधिकारियों ने परेशान करना शुरु कर दिया। मुंबई से बडवाह में में ट्रांसफर कर दिया गया। बच्चों की पढ़ाई बीच सेंशन में उन्हे यहां लाना पड़ा। अब उनके ऊपर विभागीय जांच चल रही है। जिसको लेकर हमारा पूरा परिवार तबाह हो गया है। इस तनाव में मेरा गर्भपात हो गया। प्रधानमंत्री तक शिकायत कर चुके हैं। हम चाहते हैं हमें न्याय मिले। सिर्फ मेरे ही पति नहीं बल्कि सभी जवानों के साथ अधिकारी ऐसा ही बर्ताव करते हैं। उनसे घर का काम करवाया जाता है।’

इस पूरी लड़ाई में सारी शिकायतें अमरदीप ने ही की हैं। मगर इस पूरे मामले में उनकी पत्नी इस मुद्दे को लेकर बाहर आई हैं। स्नेहलता का तो यहां तक कहना है कि बड़े अधिकारियों का छोटे कर्मचारियों के साथ यही रवैया रहता है। मगर उनकी शिकायतों पर कभी ध्यान नहीं दिया जाता। और कोई इस तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसको लगातार प्रताड़ित किया जाता है। अब स्नेहलता प्रधानमंत्री से न्याय के लिये गुहार लगा रही है।