नोटबंदी के कारण कर्ज में डूबे किसान

नोटबंदी से किसानों की हालत अब तक बदतर बनी हुई है और वो लगातार कर्ज में डूबते जा रहे हैं...

नोटबंदी के कारण कर्ज में डूबे किसान

नोटबंदी के बाद से बिगड़ी किसानों की हालत अब तक बदतर बनी हुई है और वो लगातार कर्ज में डूबते जा रहे हैं. खास तौर पर इन दिनों सब्जी उत्पादक किसान बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं.

अब मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के किसान भी नोटबंदी की मार से बच नहीं पाए है. यहां किसानों को टमाटर के इतने दाम भी नहीं मिल पा रहे हैं कि वो उत्पादन लागत निकाल सकें.

हालात ये हैं कि मंडी में टमाटर लेकर आ रहे किसान 25 किलो से भरी टमाटर की कैरेट 20 या 25 रुपये में बेच रहे हैं. यानी एक किलो टमाटर के दाम 80 पैसे पहुंच गए है, जिसमें मुनाफा तो दूर की बात है मंडी तक टमाटर लाने की लागत भी उन्हें अपनी जेब से देनी पड़ रही है. किसानों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में वो लगातार कर्ज में दबते जा रहे हैं.

किसानों की मुसीबत ये है कि बैतूल के बाहर होशंगाबाद, हरदा, इटारसी में भी टमाटर की मांग नहीं होने से उनके सामने स्थानीय मंडी में ही कौड़ियों के भाव टमाटर बेचने की मजबूरी है. एक ऐसे ही किसान नारायण का कहना है कि टमाटर समेत दूसरी सब्जियों के भी भाव इतने गिरे हुए हैं कि खेत से सब्जी तोड़कर बाजार लाना तक घाटे का सौदा बना हुआ है.

केवल किसान ही नहीं सब्जी खरीदने वाले थोक व्यापारी और फुटकर विक्रेता भी केवल काम करने के नाम पर खरीदी बिक्री कर रहे हैं.

बैतूल सब्जी मंडी के अध्यक्ष राजकुमार राठौर के अनुसार, जब तक मौसम साफ है और नोटबंदी का असर कम नहीं होता किसान की यही हालत बनी रहेगी.