गर्भपात क़ानून को ट्रंप की मंजूरी

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मेक्सिको सिटी गर्भपात क़ानून को फिर से लागू कर दिया है. नए राष्ट्रपति के रूप में कार्यालय के पहले दिन सोमवार को उन्होंने क़ानून पर दस्तखत किए.

गर्भपात क़ानून को ट्रंप की मंजूरी

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मेक्सिको सिटी गर्भपात क़ानून को फिर से लागू कर दिया है. नए राष्ट्रपति के रूप में कार्यालय के पहले दिन सोमवार को उन्होंने क़ानून पर दस्तखत किए.

ट्रंप का ये आदेश वॉशिंगटन में ट्रंप के खिलाफ हुए महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के दो दिन बाद आया है. इसके साथ ही अमरीका में गर्भपात पर पाबंदी पर एक बार फिर से चर्चा छिड़ गई है.

बता दें,  मेक्सिको सिटी गर्भपात क़ानून कहता है कि गर्भपात करवाने में मदद करने या इसके बारे में जानकारी देने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठनों को अमरीका की सरकारी एजेंसियों की ओर से अनुदान नहीं मिलेगा.

क़ानून पर दस्तखत करती ट्रंप और उनके सहयोगियों की तस्वीर और टैगलाइन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. ट्विटर पर इस तस्वीर को "महिला देह के बारे में फैसला करते पुरुष" के साथ हज़ारों बार शेयर किया गया.

सोशल मीडिया पर लोग चिंता जता रहे हैं कि महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण इस क़ानून पर मुहर लगाते वक्त वहाँ एक भी महिला मौजूद नहीं थी. जहाँ कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर गर्भापत पर ट्रंप की इस पहल का स्वागत किया है , वहीं कुछ लोग इसके असर को लेकर चिंता जता रहे हैं.

लेकिन इसके बारे में जो तस्वीरें और बातें वायरल हो रही हैं वे पूरी हकीकत नहीं बताते. तो चलिए इस पूरे मसले को समझते हैं कि ट्रंप के इस आदेश का आखिर मतलब क्या है.

कहीं ये अमरीका में गर्भपात पर पाबंदी लगाने की ओर बढ़ा एक कदम तो नहीं है? ऐसा नहीं है, क्योंकि इस क़ानून का अमरीका से फिलहाल कोई लेना-देना नहीं है.क़ानून कहता है कि सरकार से अनुदान पाने वाली ग़ैरसरकारी एजेंसियों को ये बात माननी होगी कि " वो ना तो गर्भपात को बढ़ावा देंगे और न ही दूसरे देशों में परिवार नियोजन के लिए इस प्रकिया को बढ़ावा देंगे."