लैंगिक समानता में भारत की ऊंची छलांग

भारत पिछले साल के मुकाबले वेतन और शिक्षा में कम होते लैंगिक अंतर की वजह से लैंगिक समानता सूचकांक में दुनिया के 21 पायदान ऊपर उठा है।

लैंगिक समानता में भारत की ऊंची छलांग

भारत पिछले साल के मुकाबले वेतन और शिक्षा में कम होते लैंगिक अंतर की वजह से लैंगिक समानता सूचकांक में दुनिया के 21 पायदान ऊपर उठा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) द्वारा दी गई रैंकिंग में राजनैतिक सशक्तिकरण के रूप में भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों की सूची में शामिल है। यह अच्छी खबर है, लेकिन इस सूचकांक में भारत अभी भी 144 देशों में निराशाजनक 87वें स्थान पर है। पाकिस्तान का स्थान रिपोर्ट में नीचे से दूसरे पायदान पर है, जबकि शीर्ष स्थान आइसलैंड ने हासिल किया है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक जारी ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2016 के मुताबिक भारत ने यह लैंगिक अंतर इस साल 2 फीसदी की दर से खत्म करने में सफलता पाई है। विश्व आर्थिक मंच द्वारा यह अंतर चार मापदंडों पर निर्धारित होता है, जिनमें अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और राजनैतिक प्रतिनिधित्व को शामिल किया जाता है। इस रिपोर्ट के मुतबिक भारत ने काफी हद तक प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा दाखिले में लैंगिक अंतर को खत्म करते हुए 108वां स्थान हासिल किया है, लेकिन आर्थिक मामलों पर अभी उसे काफी कार्य करने की जरूरत है।

आर्थिक भागीदारी में भारत कुछ बेहतर
बता दें कि आर्थिक भागीदारी में ब्रिक्स देशों में दक्षिण अफ्रीका 15वें, रूस 75वें, ब्राजील 79वें और चीन 99वें स्थान पर है। चीन पिछले साल 91वें पायदान पर था, जो कि 2014 की उसकी रैंकिंग (87) से कम था। अब चीन और नीचे खिसक गया है। वहीं आर्थिक भागेदारी में भारत पिछले साल की रैंकिंग (139) से थोड़ा बेहतर स्थिति (136) में पहुंच गया है। इसके साथ ही शिक्षा में भारत को 113वां स्थान मिला है, जो कि पिछले साल 125वां था।