ब्लैक लिस्टेड कंपनी से सरकार ने किया है करार

कैश की किल्लत दूर करने के लिए ब्लैक लिस्टेड ब्रिटिश कंपनी से करार का खुलासा

ब्लैक लिस्टेड कंपनी से सरकार ने किया है करार

ब्लैक मनी का खात्मा करने का दावा करने वाली सरकार ने ब्लैक लिस्टेड कंपनी के साथ करार किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस अपने एक फ़ैसले को लेकर गंभीर आरोपों में घिरते नज़र आ रहे हैं। फडणवीस ने केन्द्रीय सरकार के हाथों ब्लैक लिस्ट की गई ब्रिटिश कंपनी De La Rue को औरंगाबाद में 10 एकड़ ज़मीन उपलब्ध कराई है।

शिवसेना के नासिक से सांसद हेमंत गोडसे ने खुलासा किया है कि महाराष्ट्र सरकार ने De La Rue के साथ 10 एकड़ का प्लाट महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन(MIDC) कॉमप्लेक्स औरंगाबाद में लिया है। इस 10 एकड़ के प्लाट पर De La Rue सात सौ करोड़ का करेंसी प्रिंटिंग प्लांट लगाएगी।

गोडसे ने बताया है  कि 2016 दिसंबर की शुरुआती दिनों में उन्होनें नासिक के एक समारोह में इस बात की जानाकरी वित्त मंत्री अरुण जेटली को दी थी।  गोडसे ने अरुण जेटली से कहा था  कि डे ला रु को गृहमंत्रालय ब्लैक लिस्टेड कर चुका है और इसके बाद भी मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस कंपनी के साथ क़रार किया और सरकार ने इन्हें हर तरह की NOC भी दे दी। ऐसा बताया जाता है कि डे ला रु करेंसी प्रिंटिंग कंपनी को स्थापित करने के बाद 90 फ़ीसदी विदेशी करेंसी छापेगी।

इस मामले को केरल के पूर्व सीएम ओमन चांडी भी उठा चुके हैं। चांडी ने तथ्यों को उजागर करते हुए कहा था आखिर एक ब्लैक लिस्टेड ब्रिटिश कंपनी से भारत सरकार क्यों डील कर रही है।

बता दें कि  केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने 9 दिसंबर को संसद को बताया था कि प्लास्टीक करेंसी का काम किसी विदेशी कंपनी के साथ शुरु हो चुका है।

De La Rue नोट छापने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है और 2011 में गृह मंत्रालय ने De La Rue को गंभीर आरोपों में ब्लैक लिस्टेड कर दिया था। De La Rue के ऊपर आरोप था कि जो करेंसी पेपर इसने भारत को सपलाई किये वही पेपर इस कंपनी ने पाक़िस्तना को भी सपलाई किये। यही नहीं De La Rue ने भारत को 300 करोड़ रुपये से ज़्यादा के डिफेक्टिव करेंसी पेपर भी सप्लाई किये थे।