23 साल बाद रिहा हुए पिता से मिलते ही 27 साल के बेटे की दिल का दौरा पड़ने से मौत

हत्या के केस में बंद पिता की 23 साल बाद हुई रिहाई, खुशी के मारे 27 साल के बेटे की दिल का दौरा पड़ने से मौत।

23 साल बाद रिहा हुए पिता से मिलते ही 27 साल के बेटे की दिल का दौरा पड़ने से मौत

साल 1996 में जब साजिद मकवाना के पिता हसन को बॉम्बे हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई तो वे मुश्किल से चार साल को होगा। हसन ने सजा सुनाए जाने के बाद कभी भी पैरोल के लिए आवेदन नहीं किया। इसलिए 23 साल की सजा पूरी होने के बाद जब हसन मंगलवार को कालंबा सेंट्रल जेल से रिहा हो रहे थे तो उसका बेटा साजिद बहुत की खुश था। हालांकि, उसके पिता के रिहा होने की खुशी उसे कुछ ज्यादा ही गई, जिसकी वजह से जेल के बाहर ही साजिद की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।

अंग्रेजी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' ने अपनी रिपोर्ट में जेल के सुप्रिडेंट शरद शेल्के के हवाले से लिखा है कि 64 वर्षीय हसन जेल से दोपहर में बाहर आए। अखबार को शेल्के के मुताबिक, ‘जब वह बाहर निकला तो पहले तो उन्होंने जेल की तरफ अपना मुंह करके सैल्यूट किया और फिर अपने परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए चले गए, जो कि सड़क की दूसरी साइड कार में थे। साजिद अपने पिता से मिलने को लेकर बहुत ही खुश था, वह अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पा रहा था। जब वह हसन से बातचीत कर रहा था, तभी साजिद ने सीने में दर्द की शिकायत की और गिर गया। परिवार के सदस्य उसे नजदीकी अस्पताल में ले गए, डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित दिया।

साजिद मुंबई के अंधेरी में एक मोटर ड्राइविंग स्कूल चलाता था। उसने अपने पिता हसन के जेल से छूट जाने के बाद शादी करने का प्लान बनाया था। हसन का एक युवक से झगड़ा हुआ था, जिसकी बाद में मौत हो गई थी। इसके बाद साल 1977 में मुंबई पुलिस ने हसन को गिरफ्तार कर लिया। फिर 1978 में कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी। हसन ने साल 1981 में बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और जमानत ले ली। फिर 1996 में हाईकोर्ट ने इस मामले में हसन की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा और उसे यरवादा जेल भेज दिया गया। उसके बाद नवंबर 2015 में उसे कालंबा जेल में शिफ्ट किया गया।

साथ ही रिपोर्ट में शेल्के के हवाले से लिखा गया है कि हसन ने साल 1996 से पैरोल के लिए आवेदन नहीं किया, वह जेल में रहते हुए अपने परिवार से केवल फोन पर ही बात करते थे। पिछले हफ्ते उसे राज्य सरकार से पत्र मिला कि उन्हें 17 जनवरी को रिहा किया जा रहा है।