जांबाज हंगपन दादा को गणतंत्र दिवस पर मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया

आतंकवादियों का बहादुरी से सामना कर उन्‍हें मार गिराने वाले शहीद हवलदार हंगपन दादा को गणतंत्र दिवस पर मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया.

जांबाज हंगपन दादा को  गणतंत्र दिवस पर मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया

कश्‍मीर के नौगाम सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ का प्रयास कर रहे चार आतंकवादियों का बहादुरी से सामना कर उन्‍हें मार गिराने वाले शहीद हवलदार हंगपन दादा को गणतंत्र दिवस पर मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया.

शहीद हंगपन दादा की पत्नी चासेन लोवांग दादा ने नम आंखों के साथ राष्‍टप्रति प्रणब मुखर्जी के हाथों यह सम्‍मान ग्रहण किया. यह शांतिकाल का सर्वोच्‍च वीरता अवॉर्ड है. दादा को यह सम्मान उनके अदम्य साहस, वीरता और बलिदान के लिए दिया गया.

गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि अबू धाबी के राजकुमार मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस भावुक क्षण के गवाह रहे. राष्ट्रपति ने इस शहीद जवान के साहस को सलामी दी.

अरुणाचल प्रदेश के बोरदुरिया गांव में जन्‍मे हंगपन दादा के बड़े भाई लापहंग दादा बताते हैं कि हंगपन बचपन में शरारती थे. वो बचपन में पेड़ पर चढ़कर फलों को तोड़कर खुद भी खाते और अपने दोस्‍तों को भी खिलाते. वो शारीरिक रूप से बेहद फिट थे. हर सुबह वो दौड़ लगाते, पुश-अप करते. इसी दौरान खोंसा में सेना की भर्ती रैली हुई, जहां से उनका सिलेक्‍शन सेना में हुआ.
गांव के डॉन बॉस्को चर्च के फादर प्रदीप बताते हैं मेरी उनसे करीब दस बार से मिला होऊंगा. उन्‍होंने बताया था कि सेना में जाने के बाद वे अपने काम से काफी खुश थे. वे मेरे पास आए थे और मुझसे कहा था कि फादर मेरी पोस्टिंग जम्‍मू-कश्‍मीर हो रही है.