J&K: विपक्ष को मिला एक और हथियार

बजट सत्र में कश्मीर हिंसा समेत कई मुद्दों पर लामबंद विपक्ष को और एक हथियार मिल गया है। घाटी में सरकारी कार्यक्रमों में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत दो स्थानीय विधायकों को न बुलाए जाने से नेकां नाराज है।

J&K: विपक्ष को मिला एक और हथियार

बजट सत्र में कश्मीर हिंसा समेत कई मुद्दों पर लामबंद विपक्ष को और एक हथियार मिल गया है। घाटी में सरकारी कार्यक्रमों में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत दो स्थानीय विधायकों को न बुलाए जाने से नेकां नाराज है।

वह इस मुद्दे पर विपक्ष को एकजुट करने में जुटी है। साथ ही सत्ता पक्ष खासकर पीडीपी सदस्यों से संपर्क स्थापित कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, नेकां 9 जनवरी को इस मुद्दे को सदन में उठाकर विशेषाधिकार हनन का मुद्दा बना सकती है।

4 जनवरी को श्रीनगर में मुख्यमंत्री ने दो मल्टी लेवल पार्किंग की नींव पत्थर रखी थी। जिसमें स्थानीय विधायक अल्ताफ बुखारी को न तो बुलाया गया और न ही उनका नाम शिलापट्ट पर था। यही हाल बीरवाह में सड़क के अपग्रेडेशन के लिए आयोजित कार्यक्रम का था जहां पूर्व मुख्यमंत्री विधायक उमर अब्दुल्ला को नहीं बुलाया गया। शिलापट्ट पर भी उनका नाम नहीं था।

सूत्रों की मानें तो इस मुद्दे से नाराज नेकां ने विपक्षी दलों के साथ ही बीजेपी-पीडीपी से भी संपर्क साधा है। नेकां के एक विधायक ने बताया कि यह ओछी राजनीति है। स्थानीय विधायक को तो बुलाया ही जाना चाहिए था। पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कभी भी स्थानीय विधायकों की अनदेखी नहीं की। वे जब भी जिस विधानसभा में जाते थे वहां के स्थानीय विधायक को साथ जरूर ले लेते थे।

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की ओर से नई परंपरा शुरू किए जाने से विधायकों को अपने क्षेत्र में अपमान का घूंट पीना पड़ेगा। जनता की ओर से चुने गए जनप्रतिनिधि की उपेक्षा किया जाना उचित नहीं है। नेकां विधायक ने कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया जाएगा और सरकार को इसका जवाब देना होगा।