×

कर्नाटक: वकीलों ने CJI को लिखी चिट्ठी- जाति और भाई-भतीजावाद कर मुख्य न्यायाधीश ने चुने जज

कर्नाटक के मुख्य जस्टिस एसके मुखर्जी की अगुआई में जजों के एक कलीजियम द्वारा कर्नाटक बार असोसिएशन से 9 वकीलों को हाई कोर्ट का जज बनाने में सिफारिश का मामला सामने आया है।

कर्नाटक के मुख्य जस्टिस एसके मुखर्जी की अगुआई में जजों के एक कलीजियम द्वारा कर्नाटक बार एसोसिएशन से 9 वकीलों को हाई कोर्ट का जज बनाने में सिफारिश का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में वकीलों ने जातिवाद का आरोप लगाया है। वकीलों के एक समूह ने भारत के प्रधान न्यायधीश, पीएम नरेंद्र मोदी और कानून मंत्री को पत्र लिखकर नए जजों की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं।

मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक कर्नाटक अनुसूचित जाति/जनजाति और माइनॉरिटी एडवोकेट्स फेडरेशन के तले वकीलों ने सीजेआई जेएस खेहर ने अनुरोध किया है कि वह कर्नाटक कलीजियम द्वारा चुने गए वकीलों को रद्द करे क्योंकि इनमें से 6 वकील उसी समुदाय के हैं, जिस से जस्टिस मुखर्जी संबध रखते हैं। इसके साथ ही 3 में से 2 वकील हाई कोर्ट के रिटायर्ड जजों के बेटे हैं।

फेडरेशन ने आरोप लगाया है कि यह न्यायपालिका में जातिवाद, पैरवी और भाई-भतीजेवाद का मामला है। फेडरेशन ने अपने पत्र में कहा कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चयन प्रक्रिया तब शुरू होनी चाहिए जब योग्यता और पारदर्शिता का काम पूरा हो जाए। फेडरेशन ने कर्नाटक के चीफ जस्टिस एसके मुखर्जी को उत्तराखंड में ट्रांसफर करने की मांग भी की, जो पिछले 8 महीने से पेंडिंग है।

फेडरेशन ने दावा किया है कि मुख्य जस्टिस एसके मुखर्जी, जस्टिस जयंत पटेल और जस्टिस एचजी रमेश के कलीजियम ने बार के 9 वकीलों को चुना है। 9 लोगों में से 6 ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। इस पत्र में उन्होंने नए सीजेआई से कहा कि एडवोकेट्स असोसिएशन अॉफ बेंगलुरु ने भी दिसंबर में कलीजियम की एेसी ही सिफारिश पर सांप्रदायिक कार्रवाई करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि हम इस बारे में कर्नाटक हाई कोर्ट के कलीजियम के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, हमें संवैधानिक संस्था के जातिवादी चयन पर सुप्रीम कोर्ट से जवाब चाहिए।

Top