मौनी अमावस्या: संगम तट पर 80 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

संगम तट पर मौनी अमावस्या के मौके पर श्रद्धालुओं ने शुक्रवार को स्नान किया। लेकिन देर रात से ही मौसम खराब हो गया और बारिश होने से ठंड बड़ गई। इसके बावाजूद भी श्रद्धालुओं ने माघ मास के प्रमुख स्नान पर्व पर आस्था की डुबकी लगाई...

मौनी अमावस्या: संगम तट पर  80 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

संगम तट पर मौनी अमावस्या के मौके पर श्रद्धालुओं ने शुक्रवार को स्नान किया। लेकिन देर रात से ही मौसम खराब हो गया और बारिश होने से ठंड बड़ गई। इसके बावाजूद भी श्रद्धालुओं ने माघ मास के प्रमुख स्नान पर्व पर आस्था की डुबकी लगाई। मेला प्रभारी आशीष कुमार मिश्रा का कहना है कि ठंड होने के बाद भी 9 बजे तक करीब 80 लाख लोगों ने स्‍नान किया। डीएम संजय कुमार के मुताबिक, डेढ़ से दो करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान करने की उम्मीद है।

बता दें कि ज्‍योतिषाचार्यों की मानें तो श्रद्धालुओं के लिए ये पहला मौका होगा जब उनको सदियों बाद इसका पुण्य योग 24 घंटे से ज्‍यादा वक्त तक रहेगा। आज तीर्थराज प्रयाग में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी (संगम) में डुबकी लगाने से मनुष्‍य के लिए मोक्ष के द्वार खुल जाएंगे। मौनी अमावस्या पर देव, दानव, मानव, किन्नर, पशु, पक्षी सभी एक साथ संगम में डुबकी लगाने आते हैं। इस दिन स्नान-दान करने वाले इंसान के जन्म-जन्मांतर तक के पाप धुल जाते हैं।

गौरतलब है कि भारतीय विद्या भवन के ज्योतिष संकाय के प्राचार्य पंडित त्रिवेणी प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि आज भोर 4.48 बजे से अमावस्या तिथि लग गई है। ये कल सुबह 5.32 बजे तक रहेगी। आज मकर राशि में सूर्य और चंद्रमा का संचरण होगा। देवगुरु बृहस्पति तुला राशि में रहेंगे। वहीं उत्तराषाढ़ नक्षत्र, व्रज योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। इसमें मौन रहकर स्नान करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी। स्नान के बाद तिल, कंबल, ऊनी वस्त्र, स्वर्ण, गोदान और फल का दान करना पुण्यकारी रहेगा।

साथ ही प्राचार्य ने बताया कि इस दिन सूर्य और चंद्रमा गोचरवश मकर राशि में आते हैं। इसी दिन ब्रह्माजी ने मनु महाराज और महारानी शतरूपा को प्रकट कर सृष्टि की शुरुआत की थी। उन्‍होंने बताया कि मनुष्य के अंदर तीन मैल कर्म, भाव और अज्ञानता का होता है, जो संगम स्नान से धुल जाता है।