माकपा ने मोदी पर साधा निशाना, कमीशन चार्ज को बताया ‘चोरी’

माकपा ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि नोटबंदी के समय केंद्र सरकार ने दावा किया था कि इससे आतंकवाद पर लगाम लगने के साथ-साथ भ्रष्टचार एवं कालाधन समाप्त होगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बल्कि आम लोगों को इससे ज्यादा परेशान हो गई है।’

माकपा ने मोदी पर साधा निशाना, कमीशन चार्ज को बताया ‘चोरी’

नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की पोलित ब्यूरो की सदस्य एवं पूर्व सांसद सुहासिनी अली ने आज कहा कहा, ‘नोटबंदी के समय केंद्र सरकार ने दावा किया था कि इससे आतंकवाद पर लगाम लगने के साथ-साथ भ्रष्टचार एवं कालाधन समाप्त होगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बल्कि आम लोगों को इससे ज्यादा परेशान हो गई है।’

सुहासिनी ने बताया कि नोटबंदी से देश के गांवों, शहरों, उद्योगों, खेती, रोजगार, स्वास्थ्य एवं पोषण पर बेहद विनाशकारी असर पड़ा है। इससे कंपनियों में छंटनी और उद्योगबंदी हुई है। उन्होंने कहा कि 11 लाख करोड़ रुपए बड़े-बड़े उद्योगपतियों पर बैंकों के बाकी हैं। ये जनता के पैसे थे, जिन्हें बैंकों के जरिए इन बड़े-बड़े उद्योगपतियों को रिण के रूप में दिया गया। बैंक इससे अस्वस्थ हो गए हैं। सुहासिनी ने आरोप लगाया, ‘यदि लोग अपने इन पैसों को बैंक से निकाल लेते तो, बैंक डूब जाते। इसको बचाने के लिए सरकार ने नोटबंदी की। ऐसी परिस्थिति बना दी, जिससे लोग अपना पैसा ही बैंकों से न निकाल सकें।’

मोदी सरकार की ‘नकदी रहित’ एवं ‘डिजिटल’ लेनदेने के मिशन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, ‘इसमें हर ट्रांजेक्शन पर कमीशन चार्ज लिया जाता है। यह चार्ज एक प्रकार से चोरी है, डकैती है और डिजिटल क्षेत्र में काम करने वाली विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाना इसका मकसद है।’ उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने यह भी दावा किया था कि नोटबंदी के बाद कोई भी जाली नोट नहीं छाप सकेगा, फिर भी जाली नोट छपने बंद नहीं हुए हैं।

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