50,000 रुपए से ज्यादा कैश निकालने पर टैक्स लगाने की सिफारिश

देश में डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए बनी समिति ने बैंकों से 50,000 रुपए और इससे अधिक नकद निकासी पर बैंकिंग कैश ट्रांजेक्शन टैक्स (बीसीटीटी) लगाने की सिफारिश की है।

50,000 रुपए से ज्यादा कैश निकालने पर टैक्स लगाने की सिफारिश

देश में डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए बनी समिति ने बैंकों से 50,000 रुपए और इससे अधिक नकद निकासी पर बैंकिंग कैश ट्रांजेक्शन टैक्स (बीसीटीटी) लगाने की सिफारिश की है। इस नए नियम के अनिसार आयकर के दायरे में आने वालों और छोटे दुकानदारों को स्मार्टफोन खरीदने पर 1,000 रुपए सब्सिडी देने का सुझाव भी दिया गया है।

साथ ही प्वाइंट आॅफ सेल (पीओएस) मशीन से भुगतान पर लगने वाले मर्चेंट डिसकाउंट रेट (एमडीआर) को कम करने या पूरी तरह से समाप्त करने को कहा है। मीडिया रिपाेर्टस के मुताबिक नीति आयोग में आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में बनी इस उपसमिति ने मंगलवार को प्रधानमंत्री को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। इसमें यह सिफारिशें की गई हैं। नायडू ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट सौंपने के बाद यह जानकारी दी।


मानाजा रहा है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में भी केंद्र सरकार की ओर से डिजिटल पेमेंट्स पर तमाम तरह की छूटों की घोषणा हो सकती है। इस बार केंद्र सरकार एक महीने पहले बजट पेश करने की तैयारी में है। सरकार का तर्क है कि पहले बजट पेश करने से वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही तमाम योजनाओं का काम शुरू किया जा सकेगा।


नायडू ने बताया कि एमडीआर खत्म करने के लिए समिति की रिपोर्ट रिजर्व बैंक को भी सौंपी जाएगी, क्योंकि यह काम केंद्रीय बैंक को ही करना है। वर्ष 2005 में यूपीए सरकार ने 25,000 रुपए से अधिक की नकद निकासी पर राजस्व प्राप्त करने के उद्देश्य से टैक्स लगाना चाहती थी, लेकिन उस समय डिजिटल लेनदेन के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं था। अभी भारत दुनिया में एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास ‘आधार’ नंबर आधारित बायोमेट्रिक पहचान की सुविधा है और इसके जरिये होने वाला लेनदेन सबसे सुरक्षित है। इसके बावजूद समिति ने डिजिटल लेनदेन को और सुरक्षित करने के लिए हर लेनदेन पर बीमा मुहैया कराने की सिफारिश भी की है।


अन्य सिफारिशों में यह भी

सालाना आय से निर्धारित राशि लेनदेन डिजिटल माध्यम से करने पर टैक्स में छूट दी जाए। आधार’ आधारित भुगतान के लिए बायोमेट्रिक मशीन की खरीद पर दुकानदारों को 50% सब्सिडी दी जाए। डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारियों से पिछले वर्षों के बारे में कोई पूछताछ की जाए। महानगरों में बसों-ट्रेनों में किराये के भुगतान के लिए कांटेक्टलेस भुगतान को बढ़ावा दिया जाए। शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों को भी डिजिटल लेनदेन में तत्काल शामिल किया जाए। यूपीआई एप को क्यूआर कोड आधारित बनाया जाए। बैंकों से भी मर्चेंट स्तर पर क्यूआर कोड आधारित भुगतान को बढ़ावा दिया जाए। देश के सभी 1.54 लाख डाकघरों में आधार आधारित माइक्रो एटीएम लगाए जाएं। सभी पेमेंट बैंकों और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स को एईपीएस के जरिये इंटरपोर्टेबल किया जाए।