पिता-पुत्र में नहीं हुई सुलह, अब 'साइकिल' पर चुनाव आयोग करेगा फैसला

अखिलेश और मुलायम सिंह के बीच नहीं बनी बात, मंगलवार को करीब साढ़े तीन घंटे चली वार्ता फेल हो गई है।

पिता-पुत्र में नहीं हुई सुलह, अब

अखिलेश और मुलायम के बीच मंगलवार को करीब साढ़े तीन घंटे चली वार्ता फेल हो गई है. अखिलेश कैंप की तरफ से राम गोपाल यादव ने बताया कि बैठक में न ही कोई समझौता हुआ, न ही कोई सुलह हुई है. जो भी बात चल रही है, उसका कोई मतलब नहीं है क्योंकि हम चुनाव आयोग जा चुके हैं, इस पर अब वही फैसला करेगा।

इससे पहले चुनाव आयोग में अपना पक्ष रखने के बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव लखनऊ लौट आए थे. सुबह से ही खबरें आना शुरू हो गई कि मुलायम और अखिलेश के बीच सुलह हो सकती है. इसी बीच सीएम अखिलेश यादव मुलायम सिंह से मिलने उनके आवास पहुंचे. समाजवादी पार्टी के भविष्य को लेकर इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा था।

करीब तीन घंटे बीस मिनट बाद अखिलेश यादव की मुलायम के साथ बैठक समाप्त हो गई है. अखिलेश पहले मुलायम के घर से निकलकर अपने आवास गए, उसके बाद वह सीधे मुख्यमंत्री आवास के लिए रवाना हो गए. शिवपाल अभी भी मुलायम आवास पर हैं.

सूत्रों के अनुसार मुलायम सिंह यादव ने नारद राय और ओम प्रकाश सिंह तलब किया. दोनों ही शिवपाल खेमे के नेता माने जाते हैं.

इससे पहले शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि मुझे बैठक के बारे में नहीं पता है, अगर नेताजी बुलाते हैं तो जरूर जाऊंगा. शिवपाल के बयान आने के कुछ देर बाद ही खुद शिवपाल अपने बेटे आदित्य के साथ मुलायम आवास पहुंच गए हैं.

सूत्रों के अनुसार अभी भी मुलायम और अखिलेश में सुलह की गुंजाइश बनी हुई है. टिकटों के बंटवारे के अधिकार से लेकर संगठन में बदलाव और कुछ प्रमुख लोगों की पार्टी से रुखसती के अधिकार मिलने पर अखिलेश पिता मुलायम के समक्ष सरेंडर कर सकते हैं. यह भी चर्चा है कि पिता-पुत्र में सहमति बनी है कि अखिलेश यादव सपा का अध्यक्ष पद छोड़ देंगे.

सूत्रों के अनुसार अखिलेश की एक शर्त ये भी है कि शिवपाल यादव को राष्ट्रीय राजनीति में भेज दिया जाए, क्योंकि प्रदेश में रहकर दोनों साथ काम नहीं कर सकते. गौरतलब है कि अखिलेश अमर सिंह के साथ ही शिवपाल के ऊपर भी पार्टी के खिलाफ षड्यंत्र रचने का आरोप सार्वजनिक तौर पर लगा चुके हैं।

वहीं मंगलवार को अखिलेश खेमे की तरफ से प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने चुनाव आयोग में दावा पेश कर दिया है. उनका कहना है कि साइकिल चुनाव निशान उनका है और पार्टी पर भी उन्हीं का हक है.

इससे पहले सोमवार को ही मुलायम सिंह कह चुके हैं कि वे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उनके बिना अनुमति के अधिवेशन नहीं बुलाया जा सकता. लिहाजा पार्टी के सिंबल पर उन्हीं का अधिकार है।