PM मोदी ने 25 बहादुर बच्चों को किया सम्मानित

पीएम मोदी ने साल 2016 के राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने वाले 25 बच्चों को किया सम्मानित, कहा- 'मकसद के लिए जिएं जिंदगी'

PM मोदी ने 25 बहादुर बच्चों को किया सम्मानित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2016 के राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने वाले 25 बच्चों को सम्मानित किया। इन 25 बच्चों में 13 लड़के और 12 लड़कियां शामिल हैं। सम्मानित होने वाले बच्चे 26 जनवरी को होने वाली गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होंगे। इसमें 4 बच्चों को मरणोपरांत पुरस्कार दिया गया है। सम्मान पाने वाले बच्चों में केरल से 4, दिल्ली से 3, वेस्ट बंगाल और छत्तीसगढ़ के दो-दो बच्चे शामिल हैं।

वहीं, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, असम, हिमाचल प्रदेश, नगालैंड, उत्तराखंड, राजस्थान, ओडिशा औप कर्नाटक से 1-1 बच्चे शामिल हैं। मरणोपरांत सम्मानित होने वाले चार बच्चों में से मिजोरम से 2, अरुणाचल और जम्मू से 1-1 बच्चे शामिल है।

इस मौके पर पीएम मोदी ने बच्चों से कहा कि आप सभी इतने दिनों से एक साथ घूम रहे हैं, यह मौका आप सभी की दोस्ती बढ़ाने का है। आप सभी को जीवन को एक मकसद के लिए जीना चाहिए। मोदी ने कहा कि अगर हमें एक भारत श्रेष्ठ भारत का सपना पूरा करना है तो सभी को हर कोने को जानना और समझना होगा।

मोदी ने बच्चों से कहा कि आपके पराक्रम करने से आपके माता-पिता का भी सम्मान बढ़ा है, पीएम ने कहा कि लोग इस पराक्रम के बारे में तब तक आपसे पूछेंगे जब तक आप दूसरा पराक्रम नहीं करेंगे। पीएम ने बच्चों से कहा कि आप सभी को महापुरुषों की जीवनी को पढ़ना चाहिए उससे आप सभी को प्रेरणा मिलेगी। इसके साथ ही आप सभी अपने शरीर को सामर्थ्यवान बनाने के लिए खेलना जरुरी है।

ये सम्मान पाने वालों में मिजोरम की कुमारी रोलापुई भी शामिल है। वर्ष 2016 में 13 साल की ये बच्ची स्कूल की पिकनिक पर गई थी। यहां अपनी तीन सहेलियों को डूबते देखकर रोलापुई ने जान की परवाह किए बगैर नदी में छलांग लगा दी। उसने तीनों को तो बचा लिया लेकिन खुद नहीं बच पाई। सात भाई-बहनों में सबसे छोटी रोलापुई के माता-पिता कहते हैं कि उनकी बेटी का कारनामा हर बच्चे के लिए मिसाल है।

अरुणाचल प्रदेश की तार पीजू को मरणोपरांत भारत अवॉर्ड से नवाजा गया है। महज 8 साल की पीजू ने अपनी जान देकर दो सहेलियों को डूबने से बचाया था। वो बड़ी होकर आईएएस अफसर बनना चाहती थी। उसके माता-पिता को अपनी बेटी पर फख्र है लेकिन उसकी याद में आज भी उनकी आंखें नम हो जाती हैं।