मुस्लिमाें पर प्रतिबंध की बात काे ट्रंप ने किया खारिज, कहा- मीडिया गलत तरीके से कर रहा है पेश

सात मुस्लिम बहुल देशों के लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध के शासकीय आदेश का बचाव करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ‘यह प्रतिबंध मुस्लिमों पर नहीं है’ जैसा कि मीडिया द्वारा गलत प्रचार किया जा रहा है।

मुस्लिमाें पर प्रतिबंध की बात काे ट्रंप ने किया खारिज, कहा- मीडिया गलत तरीके से कर रहा है पेश

सात मुस्लिम बहुल देशों के लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध के शासकीय आदेश का बचाव करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ‘यह प्रतिबंध मुस्लिमों पर नहीं है’ जैसा कि मीडिया द्वारा गलत प्रचार किया जा रहा है। ट्रंप ने बीते शुक्रवार को उस आदेश पर हस्ताक्षर किए थे जिसके चलते सीरिया के शरणार्थियों समेत छह अन्य देशों के लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर पाबंदी लग गई। उनके इस कदम की खासी आलोचना हुई। इन सात देशों में इरान, ईराक, लीबिया, सूडान, यमन, सीरिया और सोमालिया हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह मुस्लिमों पर प्रतिबंध नहीं है जैसा कि मीडिया गलत प्रचार कर रहा है। यह धर्म के बारे में भी नहीं है। यह आतंकवाद और हमारे देश को सुरक्षित रखने को लेकर है। दुनिया भर में 40 से अधिक देश मुस्लिम बहुल हैं जो इस आदेश से प्रभावित नहीं होंगे।

ट्रंप ने कहा अमेरिका जब आश्वस्त हो जाएगा कि अगले 90 दिनों में यहां सर्वाधिक सुरक्षित नीतियां लागू हो चुकी हैं और उनकी समीक्षा की जा चुकी है तब सभी देशों के लोगों के लिए वीजा फिर से जारी किए जाने लगेंगे। उन्होंने एक वक्तव्य में कहा, ‘सीरिया में भयावह मानवीय संकट से जूझ रहे लोगों के प्रति भी मेरी भावनाएं हैं लेकिन मेरी सर्वप्रथम प्राथमिकता हमेशा ही हमारे देश की सुरक्षा और सेवा रहेगी। हालांकि राष्ट्रपति होने के नाते मैं उन पीड़ित लोगों की मदद करने के तरीके भी खोज निकालूंगा।’ अमेरिका को प्रवासियों का एक गौरवान्वित राष्ट्र बताते हुए ट्रंप ने कहा कि देश दमन के शिकार और इससे बचकर भाग रहे लोगों के प्रति दया दिखाता रहेगा लेकिन वह ऐसा अपने नागरिकों और सीमा की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए करेगा।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हमेशा से आजादी की धरती और साहसी लोगों का घर रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम इसे उन्मुक्त और सुरक्षित रखेंगे, मीडिया यह बात जानता है लेकिन कहने से बचता है।’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी नीतियां उनके पूर्ववर्ती बराक ओबामा की नीतियों जैसी ही हैं, ओबामा ने भी वर्ष 2011 में इराक के शरणार्थियों को वीजा जारी करने पर छह माह का प्रतिबंध लगाया था। ट्रंप ने कहा, ‘शासकीय आदेश में जिन सात देशों के नाम हैं ये वही देश हैं जिनकी ओबामा प्रशासन ने आतंक के स्रोत के रूप में पहचान की थी।’ अपनी आव्रजन नीतियों के आलोचक रहे सीनेटर जॉन मैक्केन और लिंडसे ग्राहम की भी ट्रंप ने कई ट्वीट कर आलोचना की।

दोनों सीनेटरों ने कहा था कि ऐसे समय पर जब अमेरिकी जवान आईएसआईएस को हराने के लिए इराकी साझेदारों के साथ कंधे से कंधा मिलकर लड़ रहे हैं तब इस शासकीय आदेश के कारण इराकी पायलटों के एरिजोना स्थित सैन्य ठिकानों पर हमारे साझा शत्रुओं से लड़ने के लिए आने पर पाबंदी लग गई। सीनेटरों ने कहा था, ‘आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई में हमारे सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी बड़ी संख्या में मुस्लिम हैं जो नफरत की विचारधारा को अस्वीकार करते हैं। इस शासकीय आदेश से यह संदेश गया कि अमेरिका नहीं चाहता कि मुस्लिम हमारे देश में आएं। इसलिए हमें यह चिंता सता रही है कि इस शासकीय आदेश से हमारी सुरक्षा बेहतर हो या ना हो लेकिन आतंकवादियों की भर्ती में इजाफा जरूर हो जाएगा।’ ट्रंप ने कहा कि मैक्केन और ग्राहम के बयान गलत हैं और आव्रजन के मुद्दे पर वह कमजोर हैं। सीनेटरों ने कहा था, ‘जल्दबाजी में शुरू की गई इस प्रक्रिया के परिणाम घातक हो सकते हैं। हमें ग्रीन कार्ड धारकों को उस देश में वापस लौटने से नहीं रोकना चाहिए जिसे वह अपना घर कहते हैं।’