अगर आप शाहरूख और नवाजुद्दीन के बड़े फैन हैं तो जरूर देखें 'रईस'

बॉलीवुड के बादशाह कहे जाने वाले शाहरूख खान को अब तक आपने सिर्फ रोमेंटिक किरदारों में देखा है लेकिन डर और बाजीगर जैसी फिल्मों में शाहरूख ने रोमेंटिक किरदार से हटकर काम किया...

अगर आप शाहरूख और नवाजुद्दीन के बड़े फैन हैं तो जरूर देखें

बॉलीवुड के बादशाह कहे जाने वाले शाहरूख खान को अब तक आपने सिर्फ रोमेंटिक किरदारों में देखा है लेकिन डर और बाजीगर जैसी फिल्मों में शाहरूख ने रोमेंटिक किरदार से हटकर काम किया और एक बार फिर उन्होंने अपने रोमेंटिक किरदार के बिलकुल अपोजिट काम किया है। उन्होंने इस बार भी हमेशा की तरह कुछ नया करने की कोशिश की है। जी हां हम बात कर रहे है शाहरूख की नई फिल्म रईस के बारे में आइए आपको बताते में फिल्म क्या कुछ खास है और फिल्म कैसे बनाई गई है।


कहानी

फिल्म की कहानी 80 के दशक में गुजरात पर आधारित  है। जहां रईस अपनी अम्मी के साथ रहा करता था। घर की आर्थिक हालत ठीक न होने की वजह से रईस का दिमाग स्कूल टाइम से ही धंधे की तरफ आकर्षित होने लगता है, वो देसी शराब बेचने के साथ साथ अंग्रेजी शराब की दुकान पर एक वर्कर के तौर पर भी लग जाता है लेकिन एक वक्त के बाद रईस किसी के अंडर में नहीं बल्कि खुद का धंधा खोलना चाहता है, जिसकी वजह से उसे कुछ पैसे इकट्ठे करने पड़ते हैं, खुद का धंधा खोलने के बाद रईस के पीछे वहां का एसपी मजूमदार (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) पड़ जाता है जो काफी कड़क पुलिसवाला है, लेकिन रईस का धंधा रोक पाने की हजार कोशिशें करने के बावजूद मजूमदार उसे पकड़ नहीं पाता है, फिर कहानी में ट्विस्ट टर्न्स आते हैं, चुनाव, दंगे बोम ब्लास्ट इत्यादि की भी अलग-अलग घटनाएं दर्शाई जाती हैं और फिल्म को अंजाम मिलता है।


डायरेक्शन

फिल्म का डायरेक्शन काफी अच्छा है। साथ ही केयू मोहनन की सिनेमेटोग्राफी कमाल की है, फिल्म का बैकग्राउंड बहुत ही अच्छा बनाया गया है जिसकी वजह से 80 के दशक का माहौल पूरी फिल्म के दौरान बना रह रहता है। फिल्म के संवाद भी काफी अच्छे हैं।

फिल्म की कहानी इंटरवल के बाद काफी खींची-खींची हुई नजर आती है, जिसके ऊपर काफी काम किया जा सकता था। साथ ही फिल्म में गानो की मौजूदगी तो है, लेकिन उससे फिल्म की रफ़्तार पर काफी असर पड़ता है, सिर्फ सनी लियॉन पर फिल्माया गया गीत ही कहानी के साथ सटीक बैठता है। फिल्म के सेकंड हाफ को और रोचक बनाया जा सकता था। माहिरा खान एक तरह से फिल्म के लिए मिस कास्ट दिखाई पड़ती हैं, उनकी मौजूदगी से फिल्म का रोमांस वाला माहौल काफी निराशाजनक रहता है।


स्टारकास्ट की परफॉर्मेंस...
फिल्म में शाहरुख खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी का काम बहुत ही बेहतरीन हैं, दोनों के बीच डायलॉग्स के आदान प्रदान भी काफी दिलचस्प हैं। एक्टिंग वाइज जहां एक तरफ नवाजुद्दीन की लिखकर लेने की स्टाइल है वहीं दूसरी तरफ शाहरुख के डायलॉग बोलने का अंदाज कमाल का है । मोहम्मद जीशान अयूब, अतुल कुलकर्णी और बाकी कलाकारों का काम भी सहज है, माहिरा खान को यहां बहुत ही अच्छा मौका मिला था, लेकिन शायद वो उसे अच्छे से भुना नहीं सकी।


फिल्म का म्यूजिक...
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है लेकिन गानो में सिर्फ लैला मैं लैला ही कहानी को न्यायसंगत कर पाता है। फिल्म देखने को लेकर तो हमारी राय आपके लिए यही है कि अगर आप शाहरूख खान और नवाजुद्दीन सिद्दीकी के बड़े वाले फैन हैं तो फिल्म देखने जरूर जाएं।