खुदरा महंगाई दर घटी, औद्योगिक उत्पादन बढ़ा

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर राहत की खबर आई है. दिसंबर में खुदरा महंगाई दर घटी है जबकि नोटबंदी के दौरान भी नवंबर में औद्योगिक विकास दर बढ़ी है.

खुदरा महंगाई दर घटी, औद्योगिक उत्पादन बढ़ा

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर राहत की खबर आई है. दिसंबर में खुदरा महंगाई दर घटी है जबकि नोटबंदी के दौरान भी नवंबर में औद्योगिक विकास दर बढ़ी है. दिसंबर में खुदरा महंगाई दर 3.63 फीसदी से घटकर 3.41 फीसदी रही है. दिसंबर में खुदरा महंगाई दर यानी सीपीआई (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) में गिरावट आने का अनुमान था और ऐसा ही हुआ. नवंबर में जहां रिटेल महंगाई दर 3.63 फीसदी रही थी वहीं दिसंबर में ये 3.41 फीसदी हो गई है. इस तरह आर्थिक आंकड़ों के मोर्चे पर सरकार को दोहरी खुशी मिली है.

वहीं नवंबर में औद्योगिक उत्पादन की विकास दर 5.7 फीसदी रही है. इसमें महीने दर महीने आधार पर भारी तेजी देखी गई है और ये अक्टूबर के -1.9 फीसदी की तुलना में 5.7 फीसदी हो गई है. नवंबर में औद्योगिक उत्पादन बढ़ना इस मायने में भी खास है कि इसी महीने की 8 तारीख को पीएम मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था जिसके बाद देश में 500 और 1000 के पुराने नोटों को चलन से बाहर किया गया.

बीते दो सालों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का यह निचला स्तर है। इसकी सबसे बड़ी वजह खाद्य पदार्थों की कीमत में कमी है। इससे पहले इकॉनमिस्ट का दावा था कि नवंबल में 3.63 पर्सेंट की खुदरा महंगाई दर के मुकाबले नवंबर में यह आंकड़ा 3.57 पर्सेंट हो जाएगा। इस लिहाज से यह अनुमान से अधिक गिरावट है।

यही नहीं मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ में भी खासा उछाल देखने को मिला है और यह माइनस 2.4 से पढ़कर 5.5 पर्सेंट हो गई है। बेसिक गुड्स ग्रोथ भी 4.1 से बढ़कर 4.7 पर्सेंट हो गई है। दालों की महंगाई दर 0.23 पर्सेंट घटी है। कन्जयूमर ड्यूरेबल ग्रोथ 0.2 पर्सेंट बढ़कर 9.8 पर्सेंट हो गई है। कपड़े जूते की महंगाई 4.98 पर्सेंट से घटकर 4.88 पर्सेंट हुई है। हालांकि फ्यूल महंगाई दर 2.80 से बढ़कर 3.77 पर्सेंट के आंकड़े पर पहुंच गई है।