SC ने जल्लीकट्टू पर तमिलनाडु सरकार को लगाई फटकार, कहा- कानून के राज में ये नहीं होना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जल्‍लीकट्टू को लेकर उग्र प्रदर्शन क्यों हुए और राज्य में लॉ एंड ऑर्डर क्यों बिगड़ा। कोर्ट ने कहा कि कानून के राज में ये नहीं होना चाहिए।

SC ने जल्लीकट्टू पर तमिलनाडु सरकार को लगाई फटकार, कहा- कानून के राज में ये नहीं होना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने जल्‍लीकट्टू पर प्रदर्शनों को लेकर की तमिलनाडु सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने तमिलनाडु को अपना जवाब देने के लिए 6 महीने का वक्त दिया। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल किया कि जलीकट्टू को लेकर उग्र प्रदर्शन क्यों हुए और राज्य में लॉ एंड ऑर्डर क्यों बिगड़ा। कोर्ट ने कहा कि कानून के राज में ये नहीं होना चाहिए।

मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट को जवाब देते हुए तमिलनाडु सरकार ने कहा कि जल्‍लीकट्टू पर हुए सभी प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे।सुप्रीम कोर्ट ने आगे तमिलनाडु सरकार से सवाल किया कि क्या कुछ सुरक्षा मानकों के तहत परंपराओं के नाम पर जलीकट्टू जैसी परंपरा को अनुमति दी जा सकती है। इसके साथ ही सवाल किया कि जलीकट्टू त्यौहार पशुओं के संरक्षण-क्रूरता अधिनियम, 1960 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए नागराज मामले में 2014 को दिए गए फैसले से अलग नहीं है।

क्या है जल्लीकट्टू
साडों को काबू करने वाले चार हजार साल पुराने इस पारंपरिक खेल को जल्लीकट्टू कहते हैं। इसे हर साल पोंगल त्योहार के मौके पर खेला जाता है।जल्लीकट्टू में सांड के सींग पर कपड़ा बांधा जाता है। जली का अर्थ तमिल में सल्लि या सिक्के से है और कट्टू का अमतलब थैली होता है। जो खिलाड़ी सांड के सींग पर बांधे हुए इस कपड़े को निकाल लेता है उसे ईनाम में पैसे मिलते हैं। इस खेल को बहादुरी के प्रदर्शन के तौर पर देखा जाता है। पशुओं के साथ क्रूरता को आधार मानकर सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 में इस खेल पर बैन लगा दिया था।