दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक!

गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए दायर पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। कोर्ट ने 5 जजों की स्पेशल बैंच बनाई।

दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक!

गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए दायर पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है। गुरुवार को कोर्ट ने 5 जजों की स्पेशल बैंच बनाई है। संभव है कि 5 राज्यों में चुनाव के मद्देनजर कोर्ट कोई अहम फैसला सुना सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुत्व के मुद्दे पर दायर कई पिटीशन्स पर 2 जनवरी को सुनवाई करते हुए कहा कि धर्म, जाति और संप्रदाय के नाम पर नेता वोट नहीं मांग सकते। चुनाव एक सेक्युलर प्रॉसेस है और इसका पालन किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने आगे कहा कि इंसान और भगवान के बीच रिश्ता अपनी निजी पसंद का मामला है। सरकार को इससे खुद को अलग रखना चाहिए।

हिंदुत्व के मसले पर दायर पिटीशन पर पूर्व चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अगुआई में जस्टिस एमबी लोकुर, जस्टिस एनएल राव, जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एके गोयल और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने सुनवाई की थी।

चीफ जस्टिस समेत 4 जजों ने धर्म, भाषा, संप्रदाय और जाति के नाम पर वोट मांगने को करप्ट प्रैक्टिस माना था। जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस मदन बी लोकुर, एल नागेश्वर राव और एसए बोबड़े इस फैसले पर राजी थे। जबकि बेंच के 3 जज जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस आदर्श गोयल और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ इसका विरोध किया।

इस फैसले का क्या होगा असर?

अगले 2 महीने में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में चुनाव हैं। यहां सीधे तौर पर इसका असर पड़ेगा। किसी भी चुनाव में अब कोई भी नेता, उम्मीदवार या एजेंट धर्म, जाति या संप्रदाय को लेकर लोगों से वोट नहीं मांग पाएगा।