SC: आज कर सकता है BCCI इंडिपिडेंट एडमिनिस्ट्रेटर्स अप्वॉइंट

उच्च न्यायालय आज बीसीसीआई में इंडिपिडेंट एडमिनिस्ट्रेटर्स अप्वॉइंट कर सकता है, जो बोर्ड के कामकाज पर नजर रखेंगे।

SC: आज कर सकता है BCCI  इंडिपिडेंट एडमिनिस्ट्रेटर्स अप्वॉइंट

उच्च न्यायालय आज बीसीसीआई में इंडिपिडेंट एडमिनिस्ट्रेटर्स अप्वॉइंट कर सकता है, जो बोर्ड के कामकाज पर नजर रखेंगे। बता दें कि लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं करने की वजह सुप्रीम कोर्ट ने 2 जनवरी को बीसीसीआई प्रेसिडेंट अनुराग ठाकुर और सेक्रेटरी अजय शिर्के को हटा दिया था। आज इस मामले काे लेकर 2 बजे होगी सुनवाई।

इस मामले काे लेकर आज सुप्रीम काेर्ट में दोपहर 2 बजे सुनवाई होगी, जिसमें एडमिनिस्ट्रेटर्स अप्वॉइंट करने को लेकर फैसला हो सकता है। हालांकि, इनमें कौन हो सकते हैं और कितने लोग हो सकते हैं, यह बताना मुश्किल है अभी साफ नहीं हुआ है। इन्हें बोर्ड को चलाने की पूरी पावर होगी। बता दें कि 20 जनवरी को हुई सुनवाई में एमिकस क्यूरी ने एडमिनिस्ट्रेटर्स के लिए 9 नाम बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपे थे। सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट अनिल दीवान और गोपाल सुब्रमण्यम की एमिकस क्यूरी बनाया था। एमिकस क्यूरी को एडमिनिस्ट्रेटर्स के ग्रुप के लिए लोगों को ईमानदारी से नॉमिनेट करने में मदद करने को कहा गया था।


इसलिए हटाए गए थे अनुराग और शिर्के

2 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई प्रेसिडेंट और अजय शिर्के को सेक्रेटरी की पोस्ट से हटा दिया था। इन दोनों को बोर्ड में ट्रांसपेरेंसी और जवाबदेही तय करने में फेल रहने पर हटाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि ठाकुर और शिर्के ने कोर्ट के 18 जुलाई 2016 के ऑर्डर का पालन नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने ठाकुर से उन आरोपों पर भी जवाब मांगा है, जो सुब्रमण्यम ने उन पर लगाए थे।


पिछले साल 18 जुलाई को SC ने मानी थीं लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें
सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई 2016 को बीसीसीआई के ढांचे में सुधार को लेकर की गई जस्टिस लोढ़ा कमेटी की अहम सिफारिशों को मंजूर किया था। कोर्ट ने बोर्ड को सिफारिशों पर अमल के लिए 6 महीने की डेडलाइन भी दी थी। 1 अक्टूबर को बोर्ड ने कमेटी की कई सिफारिशें मान ली थी, लेकिन कुछ अहम सिफारिशों को मानने से इनकार कर दिया, जिस पर बोर्ड और कमेटी के बीच विवाद हुआ।


बोर्ड के 88 साल के इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा

सुप्रीम कोर्ट ने 2 जनवरी को अपने फैसले में कहा था, बीसीसीआई में लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू नहीं करने के लिए ठाकुर और शिर्के जिम्मेदार हैं। पूर्व चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अगुआई वाली बेंच ने ठाकुर से पूछा था कि आखिर उनके खिलाफ केस क्यों न चलाया जाए। इस पर ठाकुर ने कहा था कि अगर अदालत को लगता है कि बोर्ड रिटायर्ड जजों के नेतृत्व में अच्छा काम करेगा तो मैं उन्हें ऑल द बेस्ट कहना चाहता हूं। बोर्ड के 88 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने इसके प्रेसिडेंट और सेक्रेटरी को हटा दिया।