आम बजट में रेल बजट का विलय

आम बजट 2017 में रेल बजट का भी विलय हो चुका होगा। नियम में बदलाव को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी मिल गई है।

आम बजट में रेल बजट का विलय

1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट 2017 में इस बार रेल बजट का भी विलय हो चुका होगा। 97 सालों के इतिहास में यह पहली बार होगा जब रेल बजट अलग से पेश नहीं किया जाएगा, बल्कि वह आम बजट का ही हिस्सा हो जाएगा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रेल बजट को केंद्रीय बजट में मिलाने के लिए सरकारी काम काज के नियमों में बदलाव की अपनी मंजूरी दे दी है।

कैबिनेट सचिवालय की ओर से जारी हालिया आदेशानुसार आर्थिक मामलों के विभाग को आम बजट (रेल बजट को) तैयार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले रेलवे विभाग को छोड़कर अन्य बजट का कामकाज निपटाता था। राष्ट्रपति ने भारत सरकार नियम, 1961 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब आर्थिक मामलों का विभाग दोनों बजट तैयार करेगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते साल सितंबर में वित्त वर्ष 2017-18 से रेल बजट को आम बजट में मिलाने के लिए कुछ ऐतिहासिक बजटीय सुधारों को मंजूरी दी थी। रेल बजट को अलग से पेश करने की परंपरा 1924 से शुरू हुई थी। आजादी के बाद भी यह परंपरा चलती रही, जबकि अलग रेल बजट की कोई संवैधानिक विवशता नहीं है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल बजट को फरवरी महीने की आखिरी तारीख के बजाय पहले पेश करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। सरकार वित्त वर्ष 2017-18 का आम बजट 1 फरवरी को पेश करेगी।