जनवरी 2016 से शुरू हो गई थी नोटबंदी की प्रॉसेस- RBI गवर्नर

आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी के सामने कहा है कि नोटबंदी की प्रॉसेस जनवरी, 2016 से शुरू हो गई थी...

जनवरी 2016 से शुरू हो गई थी नोटबंदी की प्रॉसेस- RBI गवर्नर

आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी के सामने कहा है कि नोटबंदी की प्रॉसेस जनवरी, 2016 से शुरू हो गई थी। हालांकि, उन्होंने पहले लिखित में कमेटी को बताया था कि सरकार ने 7 नवंबर को 500-1000 के बड़े नोटों को बंद करने की 'सलाह' आरबीआई को दी थी।


बुधवार को अपना पक्ष रखने के लिए वह कमेटी के फाइनेंशियल पैनल की मीटिंग में शामिल हुए। पैनल ने सवाल किया कि कितनी पुरानी रकम लौटकर आई? जवाब में पटेल ने 9.2 लाख करोड़ के नए नोट मार्केट में उतारे जाने की बात कही। शुक्रवार को आरबीआई गवर्नर संसद की लोक लेखा समिति (PAC) के सामने भी पेश हो सकते हैं। पीएसी ने 30 दिसंबर को उन्हें एक प्रशानवली भेजी थी।


 टीएमसी नेता और कमेटी के मेंबर सौगाता रॉय ने कहा, ''कमेटी ने कई सवाल किए। पूछा कि नोटबंदी का फैसला किसने लिया? आरबीआई गवर्नर यह बताने में नाकाम रहे कि बैंकों में कितना पैसा लौटकर आया। बैंकिंग सिस्टम के कब तक नॉर्मल होने के सवाल पर वे डिफेंसिव मोड में नजर आए।''


बताया जा रहा है कि पुरानी करंसी वापस जमा होने और नई प्रिंट करने के सवाल का फाइनेंस मिनिस्ट्री के अफसरों ने कोई जवाब नहीं दिया।फाइनेंशियल पैनल की अगुआई कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली और PAC की केवी थॉमस कर रहे हैं। थॉमस कह चुके हैं कि अगर उन्हें सही जवाब नहीं मिले तो कमेटी नरेंद्र मोदी को भी बुला सकती है। उर्जित पटेल के अलावा फाइनेंशियल सेक्रेटरी शक्तिकांत दास, बैंकिंग सेक्रेटरी अंजुल छिब दुग्गल और रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अधिया समेत बाकी अफसर मीटिंग में शामिल हुई।



बता दें कि मोदी सरकार ने 8 नवंबर को 500-1000 के पुराने नोट बंद करने का एलान किया था। जिसके बाद देशभर में लोगों को कैश की किल्लत से जूझना पड़ा था।