तमिलनाडु: जल्लीकट्टू में 3 की मौत, 28 घायल

तमिलनाडु के सांस्कृतिक खेल जल्लीकट्टू से प्रतिबंध हटने के बाद रविवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में इसका आयोजन किया गया, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई है और 28 लोगों के घायल होने की खबर है।

तमिलनाडु: जल्लीकट्टू में 3 की मौत, 28 घायल

तमिलनाडु के सांस्कृतिक खेल जल्लीकट्टू से प्रतिबंध हटने के बाद रविवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में इसका आयोजन किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खेल के मुख्य स्थल मदुरै के आलंगनल्लूर में इसका उद्घाटन करने गए मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम को प्रदर्शनकारियों के उग्र तेवर देख बैरंग वापस लौटना पड़ा। प्रदर्शनकारी मामले का पहले स्थायी समाधान चाहते हैं।

3 की मौत, 28 घायल
पुडुकोट्टई जिले में जल्लीकट्टू खेल के दौरान दो लोगों की मौत हो गई, जबकि मदुरै में प्रदर्शन कर रहे एक व्यक्ति की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुडुकोट्टई के रापूसाल में काबू करने के दौरान सांड़ द्वारा कुचले जाने से दो खिलाड़ियों की मौत हो गई और 28 लोगों के घायल होने की खबर है।

तमिलनाडु के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने जल्लीकट्टू के लिए अध्यादेश जारी कर दिया है। लगभग तीन साल के प्रतिबंध के बाद अब इसका फिर से आयोजन हुआ। सांड़ों पर काबू पाने के इस खेल का रविवार को मुदरै के अलगनल्लूर और राज्य के अन्य स्थानों पर आयोजन हुआ।

पनीरसेल्वम ने मोदी को एक पत्र में लिखा, ‘सरकार और तमिलनाडु के लोगों की ओर से, मैं पोंगल के दौरान एक बार फिर से तमिलनाडु में जल्लीकट्टू को सक्षम बनाने में आपके समर्थन और सहयोग के लिए शुक्रिया अदा करता हूं।’

पन्नीरसेलवम ने कहा कि अध्यादेश की जगह एक मसौदा विधेयक बगैर किसी बाधा के 23 जनवरी से शुरू हो रहे तमिलनाडु विधानसभा सत्र में पेश और स्वीकार किया जाएगा। इससे पहले दिन में मोदी ने कहा कि तमिलनाडु के लोगों की सांस्कृतिक आकांक्षाएं पूरी करने के लिए सारी कोशिशें की जा रही हैं।

इस बीच, धर्मपुरी से लोकसभा सांसद अंबूमणि रामदॉस ने आज राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की और जंतु निर्ममता निवारण अधिनियम 1960 में एक संसदीय संशोधन के जरिए जल्लीकट्टू के एक स्थायी हल की मांग की। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में लाया गया अध्यादेश सिर्फ एक अस्थायी हल है और इसे उच्चतम न्यायालय कभी भी रद्द कर सकता है।

उन्होंने बताया, ‘हमने केंद्र सरकार से यह भरोसा दिलाने को कहा है कि यदि न्यायालय कुछ समय बाद अध्यादेश को रद्द करता है तो वह संसद के आगामी सत्र में पीसीए अधिनियम में संशोधन करेगी।’