भारत में 10 सेकेंड में होने वाला डिजिटल पेमिंट है यूएस को लिए सबक: वॉशिंगटन पोस्ट

भारत में कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ाए गए कदम से अमेरिका कई सबक ले सकता है। अमेरिका ने ये पोस्ट अपने अखबार के ओपन एडिटोरियल में लिखा है...

भारत में 10 सेकेंड में होने वाला डिजिटल पेमिंट है यूएस को लिए सबक: वॉशिंगटन पोस्ट

भारत में कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ाए गए कदम से अमेरिका कई सबक ले सकता है। अमेरिका ने ये पोस्ट अपने अखबार के ओपन एडिटोरियल में लिखा है। इसमें कहा गया है कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस काफी फास्ट है। बिटक्वाइन में 10 मिनट लगते हैं, लेकिन यूपीआई से कुछ सेकंड्स में ही ट्रांजैक्शन हो जाता है। भारत ने ऐसी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी डेवलप कर ली है जो चीन की दीवार जैसी यादगार बन जाएगी। इससे यूएस काफी सबक ले सकता है।

बता दें कि द वॉशिंगटन पोस्ट में सिलिकॉन वैली के एक्सपर्ट विवेक वाधवा के लिखे ऑप-एड के मुताबिक, "भारत ने एक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है। इससे अरबों ट्रांजैक्शन होंगे, जितने बिटक्वाइन ने कभी नहीं किए। बिटक्वाइन ओपन एक पेमेंट नेटवर्क है। इसका इस्तेमाल ग्लोबल पेमेंट के लिए किया जा रहा है। हालांकि, भारत में आरबीआई या किसी रेग्युलेटर ने इसे मंजूरी नहीं दी है। वॉशिंगटन पोस्ट के एडिटोरियल में भारतीय मूल के वाधवा ने आगे लिखा, "भारत फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी के मामले में दो जनरेशन आगे निकल जाएगा और चीन की दीवार और अमेरिका के इंटरस्टेट हाईवे की तरह कुछ यादगार बना जाएगा।"


गौरतलब है कि भारत के यूनीफाइड पेमेंट सिस्टम (यूपीआई) ने बिलिंग प्रोसेस से छुटकारा दिला दिया है। इसमें क्रेडिट कार्ड के भुगतान से उलट ट्रांजैक्शन कॉस्ट जीराे है। इससे सेकंड्स में ट्रांजैक्शन हो जाता है। यह बिटक्वाइन के 10 मिनट के मुकाबले बहुत फास्ट है। आर्टिकल में भारत के एक और इनोवेशन इंडिया स्टेक की तारीफ की गई है। इंडिया स्टेक में सिक्योर्ड और कनेक्टेड सिस्टम की एक सीरीज है। इससे पर्सनल डाटा, इम्प्लाॅयमेंट रिकॉर्ड्स, टैक्स फाइलिंग्स को शेयर किया जा सकता है। इसमें डॉक्यूमेंट्स पर डिजिटल साइन भी किए जा सकते हैं।


साथ ही अमेरिकी पोस्ट में आर्टिकल में नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले की भी तारीफ की गई है। उसमे लिखा है कि यह साहसिक कदम था, जिसका लॉन्ग टर्म बेनिफिट मिलना तय है, क्योंकि यह डिजिटल करेंसी और इंडियन इकोनॉमी को बढ़ाएगा। हम कैशलेस सोसायटी बनने को तैयार नहीं हैं, लेकिन कई सबक हैं जो सिलिकॉन वैली और अमेरिका डेवलपिंग वर्ल्ड से सीख सकता है। वाधवा सिलिकॉन वैली की कार्नेगी मेलन इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। वे ड्यूक में सेंटर फॉर इंटरप्रिन्योरशिप एंड रिसर्च कमर्शियलाइजेशन में रिसर्च डायरेक्टर भी हैं।