तमिलनाडु: जल्लीकट्टू काे लेकर विवाद क्याें?

आज कल जल्लीकट्टू प्रथा पर काफी विवाद हो रहा है। कहने को यह प्रथा तमिलनाडु में ही होती है लेकिन इसपर बहस पूरे देश में हो रही है। वहीं पर सुप्रीम कोर्ट इस प्रथा पर अंतरिम बैन लगाया हुआ है। जल्लीकट्टू प्रथा में किस बात को लेकर विवाद हो रहा है? इसकी वजह क्या है, यह क्या होता है ? जानिए यहां –

तमिलनाडु: जल्लीकट्टू काे लेकर विवाद क्याें?

आज कल जल्लीकट्टू प्रथा पर काफी विवाद हो रहा है। कहने को यह प्रथा तमिलनाडु में ही होती है लेकिन इसपर बहस पूरे देश में हो रही है। वहीं पर सुप्रीम कोर्ट इस प्रथा पर अंतरिम बैन लगाया हुआ है। जल्लीकट्टू प्रथा में किस बात को लेकर विवाद हो रहा है? इसकी वजह क्या है, यह क्या होता है ? जानिए यहां –

है क्या जल्लीकट्टू ?
जल्लीकट्टू तमिलनाडु का एक परंपरागत खेल है, जिसमें बैल को भीड़ में छाेड़ दिया जाता हैं आैर भीड़ उस बैल काे काबू में करता है। यह खेल काफी सालों से तमिलनाडु में लोगों द्वारा खेला जाता है। तमिलनाडु में मकर संक्रांति का पर्व पोंगल के नाम से मनाया जाता है। इस खास मौके पर जल्लीकट्टू के अलावा बैल दौड़ का भी काफी जगहों पर आयोजन किया जाता है। एक्सपर्ट मानते हैं कि जल्लीकट्टू तमिल शब्द सल्ली और कट्टू से मिलकर बना है। जिनका मतलब सोना-चांदी के सिक्के होता है जो कि सांड के सींग पर टंगे होते हैं। बाद में सल्ली की जगह जल्ली शब्द ने ले ली ।

शुरू कब हुआ ?

बताया जा रहा है कि सिंधु सभ्यता के वक्त जो अय्यर और यादव लोग तमिल में रहते थे उनके लिए सांड पालना आम बात थी। बाद में यह साहस और बल दिखाने वाली बात बन गई। बाद में बैल को काबू करने वाले को इनाम और सम्मान दिया जाने लगा। किसी सांड को  काबू करने की प्रथा लगभग 2,500 साल पुरानी कही जा सकती है।