7 मंत्री, 9 IAS और 29 विधायकों ने कराया था BSSC पेपर लीक !

बीएसएससी की इंटरस्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के पेपर लीक मामले में एसएसपी मनु महाराज के नेतृत्व में SIT की टीम ने सनसनीखेज खुलासे हुए हैं. अब तक की जांच में यह पता चला है कि पेपर लीक करने का सौदा 50 करोड़ से अधिक में हुआ था।

7 मंत्री, 9 IAS और 29 विधायकों ने कराया था BSSC पेपर लीक !

बीएसएससी की इंटरस्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के पेपर लीक मामले में एसएसपी मनु महाराज के नेतृत्व में SIT की टीम ने सनसनीखेज खुलासे हुए हैं. अब तक की जांच में यह पता चला है कि पेपर लीक करने का सौदा 50 करोड़ से अधिक में हुआ था. एसआईटी सूत्रों के अनुसार प्रति छात्र 5 से 6 लाख रुपए में डील हुई थी. बतौर एडवांस 40 से 50 प्रतिशत राशि का पेमेंट किया गया था. शुरुआती जांच में पटना, नवादा, मुजफ्फरपुर, वैशाली छपरा में पकड़े गए फर्जीवाड़े में अब तक करीब 100 छात्रों को पास कराने की डीलिंग का खुलासा हुआ है. यानी 2 से 3 करोड़ रुपए अग्रिम राशि के रूप में परीक्षा माफिया के नेटवर्क के पास इम्तिहान से पहले पहुंच चुके थे. इसकी गवाही कुछ गिरफ्तार सेटर दलालों का बैंक एकाउंट भी दे रहा है. वैसे यह आंकड़ा दो चरणों से जुड़ा है, जबकि परीक्षा चार चरणों में होनी थी. ऐसी स्थिति में 500 से अधिक छात्रों के साथ डीलिंग होने की आशंका जताई जा रही है. एसआईटी के अफसरों ने जब पूछताछ के लिए बिहार कर्मचारी चयन आयोग के सचिव और पर्चा लीक कांड के सूत्रधार परमेश्वर राम को धरा तो पहले वह अकड़ने लगे. फिर अपने राजनीतिक आका का नाम लेकर मोबाइल से उनका नंबर मिलाने लगे पर एसआईटी के लोग नरम नहीं पड़े. इसको बाद परमेश्वर राम ने जो खुलासा किया उसे सुनकर पटना के सीनियर एसपी मनु महाराज समेत वहां मौजूद तमाम अधिकारी सन्न रह गए।

36 राजनेताओं यानी 7 मंत्री और 29 विधायकों सहित 9 IAS लाभार्थी रहे है

पूछताछ के दौरान परमेश्वर राम ने 36 राजनेताओं यानी 7 मंत्री और 29 विधायकों का जिक्र करते हुए सभी द्वारा माल पत्तर समेत लाभान्वित होने का विवरण दिया. इसके साथ ही राज्य के उच्च पदस्थ 9 आईएएस अधिकारियों का नाम लिया है, जो किसी न किसी रूप में इस घोटाले के लाभार्थी रहे हैं. गिरफ्तार परमेश्वर राम ने खुलासा किया है कि आयोग ने पिछले 5 सालों में जितनी भी नियुक्तियां की हैं, सभी में भयंकर गड़बड़ियां हुई हैं. अरबों रूपये की उगाही हुई है तथा सैकड़ों बड़े अधिकारियों और राजनेताओं के सगे-सम्बधियों की बहाली की गई है।

नालंदा, नवादा और छपरा में भी कनेक्शन ढूंढ़ रही एसआइटी

 पेपर लीक प्रकरण का ताल्लुक पटना के आयोग कार्यालय से लेकर बिहार के कई जिलों तक हैं. छानबीन में जो सबूत और तथ्य एसआइटी के हाथ लगे हैं उसके आधार पर नवादा, नालंदा और छपरा में सेटिंग का कनेक्शन ढूंढा जा रहा है. सूत्रों कि मानें तो इन तीनों जिलों में कुछ प्रभावशाली लोग हैं, जो सेटिंग के खेल को संचालित करते हैं. हर जिले में गैंग है, उनके सरगना और गुर्गे काम करते हैं. ये ऐसे लोग हैं जिन पर एसआइटी शक तो कर रही है पर हाथ डालने से पहले सबूत खंगाल रही है. सबूत मिलेंगे या नहीं ये तो आगे का अनुंसधान और उसकी दिशा पर निर्भर करता है पर इस खेल में ऐसे लोग नहीं बचने वाले हैं जो सीधे तौर पर निचले स्तर पर काम कर रहे थे. मतलब बिहार के अधिकांश जिलों से पेपर लीक और सेटिंग के खेल से जुड़े गुर्गों पर शामत आने वाली है. इन्हें दबोचने के लिए एसआइटी तेजी से काम कर रही है.


24 बैंक खातों में 50 लाख रुपये के लेनदेन का मिला रिकॉर्ड

पटना : बीएसएससी पेपर लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) ने अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है. पेपर लीक रैकेट में करीब चार दर्जन बैंक खातों और एटीएम का पता चला है, जिनके जरिये काफी बड़े स्तर पर पैसे का लेन-देन हुआ है. इसमें करीब दो दर्जन बैंक खातों की विस्तृत जानकारी इओयू ने संबंधित बैंकों से जुटा लिया है. 24 बैंक खातों में 50 लाख रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ है. इन सभी बैंक खातों में बीएसएससी की परीक्षा के दौरान या कुछ दिनों पहले बड़े स्तर पर जमा और निकासी हुई है. इन दो दर्जन बैंक खातों में से अधिकतर खाते पटना में ही अलग-अलग शाखाओं के हैं. इनमें दो खातें ऐसे मिले हैं, जिनमें अन्य खातों की तुलना में सबसे ज्यादा 15 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ है.


इसमें एक खाता मुकेश सिंह और दूसरा दानापुर के शनिचरा स्थान निवासी नीतीश कुमार सिंह का है. इसके अलावा इओयू अन्य बैंक खातों का रिकॉर्ड जुटा रहा है. चार दर्जन बैंक खातों में सबसे ज्यादा बैंक खाते और एटीएम वारिसलीगंज में हुई छापेमारी के दौरान जब्त किये गये थे. अब तक हुई जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि इन सभी संदिग्ध बैंक खातों में परीक्षा के पेपर लीक से संबंधित लेनदेन हुए हैं. हालांकि स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये पैसे अंत में कहां गये.


पेपर लीक मामले में अब तक पटना, नवादा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सोनपुर और छपरा शहर के अलग-अलग थानों में एफआइआर दर्ज हो चुकी है, जिसमें 60 से ज्यादा लोग अभियुक्त बनाये गये हैं. अब तक जितनी भी एफआइआर हुई है, उनमें दो बातें सामान्य पायी गयी हैं. तमाम अभ्यर्थियों को ब्लूटुथ या पर्ची से चोरी करते हुए ही पकड़ा गया है ।