'प्रभु' क्या हुआ तेरा वादा ? पीएमओ ने लिखा पत्र

बुलेट ट्रेन की घोषणा के बाद तो रेलवे के कायाकल्प करने की बात कही गई थी लेकिन अब केंद्र की मोदी सरकार रेल मंत्री सुरेश प्रभु के कामकाज से ही सबसे ज्यादा नाखुश है।

केंद्र में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल में अगर किसी मंत्री की सबसे ज्यादा चर्चा तो वह रेल मंत्री सुरेश प्रभु थे। बुलेट ट्रेन की घोषणा के बाद तो रेलवे के कायाकल्प करने की बात कही गई थी लेकिन अब केंद्र की मोदी सरकार रेल मंत्री सुरेश प्रभु के कामकाज से ही सबसे ज्यादा नाखुश दिखाई दे रही है।

अंग्रेजी अख़बार डीएनए की एक रिपोर्ट की माने तो प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एके मित्तल को 31 जनवरी को लिखे एक पत्र में कहा है कि रेल मंत्रालय ने पिछले दो सालों में जो लक्ष्य तय किये थे वह सभी पूरे नही हो पाए हैं। साथ ही लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं को लेकर सवाल पूछे हैं। पिछले कुछ समय में रेल दुर्घटनाओं में 225 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

रेलवे के आधुनीकरण का क्या हुआ ?

रेलवे बोर्ड को लिखे पत्र में पीएमओ ने पूछा है कि रेलवे के आधुनिकीकरण का काम अभी तक पूरा क्यों नही हो पाया है। पत्र में कहा गया है कि ''सरकार रेल के आधुनिकीकरण को लेकर कितनी संजीदा है इसको लेकर रेलवेबोर्ड भी अच्छी तरह वाकिफ है।

इसके बावजूद साल 2016 में 531 किलोमीटर रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण का काम ही हो पाया जबकि लक्ष्य 1,500 किलोमीटर का तय किया गया था। इसी तरह रेलवे ट्रैक के विद्युतीकरण का लक्ष्य भी 2,000 किलोमीटर रखा गया था, लेकिन यह काम सिर्फ 1,210 किलोमीटर में ही पूरा हो पाया है।