BMC: गठबंधन की बात पर अकेले चलने वाले उधव ठाकरे को है प्रस्ताव का इंतजार

उधव ठाकरे ने BMC चुनाव से पहले किसी के भी साथ गटबंधन न करने की बात कही लेकिन अब उसी बात को लेकर उनके सुर बदले हुए नज़र आ रहे हैं। जब उधव से गठबंधन की बात पूछी तो उनका कहना था कि अभी तक किसी का प्रस्ताव नहीं मिला है...

BMC: गठबंधन की बात पर अकेले चलने वाले उधव ठाकरे को है प्रस्ताव का इंतजार

उधव ठाकरे ने BMC चुनाव से पहले किसी के भी साथ गटबंधन न करने की बात कही लेकिन अब उसी बात को लेकर उनके सुर बदले हुए नज़र आ रहे हैं। जब उधव से गठबंधन की बात पूछी तो उनका कहना था कि अभी तक किसी का प्रस्ताव नहीं मिला है। दरअसल, शिवसेना BMC में बहुमत का आंकड़ा पूरा करने के लिए कांग्रेस से हाथ मिला सकती है। कांग्रेस की ओर से शिवसेना को समर्थन देने की पेशकश भी की गई है। वहीं बीजेपी की ओर से भी साफ-साफ संकेत दिया जा चुका है।

बता दें कि खंडित जनादेश पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि शिवसेना-बीजेपी के पास हाथ मिलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।इस बारे में अंतिम निर्णय देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे लेंगे। वहीं शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में बीजेपी पर हमला बोला है। शिवसेना ने नाम लिए बग़ैर बीजेपी पर षड्यंत्र का आरोप लगाया है। इससे पहले नतीजे वाले दिन भी उद्धव ने बीजेपी को खरी-खोटी सुनाई थी।उन्होंने कहा था कि-

बीएमसी नतीजों में सत्ता, संपत्ति के बल पर BJP की छलांग। महाराष्ट्र की सत्ता, दिल्ली की पूरी रसद लगा दी। हर संभव कोशिश के बावजूद हमें नहीं हरा पाए। महाराष्ट्र को अस्थिर करने की षड्यंत्रकारी कोशिश। इतने षड्यंत्र तो कांग्रेस के शासन में भी नहीं हुए। मन की बात नहीं, सिर्फ़ काम की बात चलती है। कुछ भी हो मुंबई में मेयर शिवसेना का ही होगा।

साथ ही संपत्ति और संसाधनों को मात देकर मुंबईकरों ने शिवसेना के प्रति जो लगातार पांचवीं बार विश्वास जताया है उसके लिए मुंबई के लोगों को धन्यवाद दिया है। उद्धव ने ऐलान किया है कि मुंबई का मेयर शिवसेना का ही होगा। इतना ही नहीं, महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री भी शिवसेना का ही होगा।

वहीं उद्धव ने कहा कि इस बार बड़े पैमाने पर वोटिंग लिस्ट से मतदाताओं के नाम गायब हुए। किसी भी मतदाता से मतदान का हक छीनना गलत है। इस बार यही गड़बड़ी हुई है। यह एक प्रकार का षड्यंत्र है। जो षड्यंत्र का दोषी है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि शिवसेना उसी सत्ता और संपत्ति की खुद भी भागीदार है। वह राज्य और केंद्र में उसी पार्टी के साथ सत्ता में है, जिस पर दोष लगा रही है।