चंद्रशेखरन लेंगे टाटा ग्रुप के चेयरमैन का चार्ज

टाटा ग्रुप के 92 साल पुराने हेडक्वार्टर 'बॉम्बे हाउस' को आज नया बॉस मिलने वाला है...

चंद्रशेखरन लेंगे टाटा ग्रुप के चेयरमैन का चार्ज

टाटा ग्रुप में नई जिम्मेदारी संभालने के लिए एन. चंद्रशेखरन ऑफिस पहुंच चुके हैं। उन्हें कार्यभार देने के लिए रतन टाटा भी पहुंचे हैं। चंद्रा 149 साल पुराने ग्रुप के पहले गैर पारसी चेयरमैन होंगे। इसके लिए चौथे फ्लोर पर कार्नर रूम यानी चेयरमैन ऑफिस को चंद्रा के लिए वैसा ही डेकोरेट किया गया है, जैसा 1980 के दशक में चेयरमैन जेआरडी टाटा और उसके बाद रतन टाटा के वक्त था। 2012 में चेयरमैन बने साइरस मिस्त्री ने रूम का लेआउट बदल

नए चेयरमैन मैराथन मैन चंद्रा के सामने सबसे पहली चुनौती तो यही है कि रतन टाटा-मिस्त्री बोर्डरूम विवाद से समूह की छवि को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई कैसे हो। साथ ही, कारोबार को फिर से आगे बढ़ाया जा सके। टाटा स्टील का इंग्लैंड का बिजनेस लगातार घाटे में चल रहा है। कुछ हिस्सा बेचने का भी फैसला हुआ है। चंद्रा को तय करना होगा कि कौन-सा हिस्सा बेचा जाना चाहिए और किस यूनिट को मुनाफे में लाया जा सकता है।


रतन टाटा का ड्रीम प्रोजेक्ट नैनो फेल रहा है। इसका घाटा 1,000 करोड़ रुपए को पार कर गया है। इससे पूरे टाटा मोटर्स के प्रदर्शन पर असर पड़ा। मिस्त्री इस प्रोजेक्ट के खिलाफ थे। उन्होंने टाटा पर आरोप लगाया था कि टाटा अपने अहम के चलते इस प्रोजेक्ट को बंद नहीं कर रहे हैं। अब चंद्रा को फैसला लेना होगा कि घाटे के बावजूद प्रोजेक्ट के कब तक जिंदा रखा जा सकता है। खासकर, यह देखते हुए कि टाटा मोटर्स की सभी यूनिट्स को मुनाफे में लाने का टारगेट है।