220 अरब डॉलर पर पहुंचा चीन के बैंकों का फंसा कर्ज

चीन में भी बैंकों का काफी कर्ज समय पर भुगतान नहीं होने की वजह से फंसे कर्ज की श्रेणी में आ गया है।

220 अरब डॉलर पर पहुंचा चीन के बैंकों का फंसा कर्ज

सिर्फ भारत में ही नहीं, चीन में भी बैंकों का काफी कर्ज समय पर भुगतान नहीं होने की वजह से फंसे कर्ज की श्रेणी में आ गया है। यह अलग बात है कि चीन में 'विजय माल्या' जैसों की भूमिका में वहां की प्रांतीय सरकारें ही हैं। बहरहाल, चीन के बैंकों का करीब 220 अरब डॉलर (करीब 14.66 लाख करोड़ रुपये) का कर्ज फंस गया है। फंसे कर्ज की इस राशि के लिए ज्यादातर चीन की प्रांतीय सरकारें जिम्मेदार हैं। प्रांतीय सरकारें ढांचागत सुविधाओं में काफी खर्च कर रही हैं, जिसके लिए बैंकों से काफी कर्ज लिया गया है। बैंकिंग रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने चाइना बैंकिंग असोसिएसन और पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि पिछले साल जिन 1,794 बैंकरों से जोखिम प्रबंधन के मामले में पूछताछ की गयी, उनमें से 90 प्रतिशत ने फंसे कर्ज के दबाव को सबसे बड़ी चुनौती बताया। पिछले साल के अंत में कमर्शल बैंकों का फंसा कर्ज 1,500 अरब युआन (करीब 14.66 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया। तीसरी तिमाही में इसमें 18.3 अरब युआन (करीब 17,744 करोड़ रुपये) की वृद्धि हुई।

इसमें कहा गया है कि सबसे ज्यादा कर्ज शहरी ढांचागत परियोजनाओं के लिए लिया गया। इसके बाद चिकित्सा क्षेत्र के कर्ज का नंबर है। प्रांतीय सरकारों की वजह से ज्यादातर कर्ज फंसा है। इन सरकारों ने अपनी प्रगति दिखाने के लिए ढांचागत परियोजनाओं पर बढ़-चढ़कर खर्च किया और कर्ज नहीं लौटा पाई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के एक शीर्ष अधिकारी ने पिछले साल चीन को कंपनियों के बढ़ते कर्ज बोझ की समस्या से निपटने के लिए कदम उठाने को कहा ताकि किसी तरह के नए ऋण-बोझ के बुलबुले को फूटने से बचाया जा सके।