नोटबंदी के बाद घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी

नोटबंदी की घोषणा के बाद घरेलू हिंसा के मामलों में काफी बढ़ोत्तरी, इसकी वजह थी कि लोगों को पता चला कि पत्नी उनकी जानकारी के बिना पैसे बचा रही है।

नोटबंदी के बाद घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद अगले कुछ हफ्तों तक घरेलू हिंसा के मामलों में काफी बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। इसकी वजह थी कि लोगों को इस बात का पता चला कि पत्नी उनकी जानकारी के बिना पैसे बचा रही है। ये बात भोपाल के वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर ने शिकायतों का विश्लेषण करने के बाद बताया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओएससीसी को मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ चलाने वाली गैर सरकारी संस्था के क्षेत्रीय निदेशक सारिका सिन्हा ने बताया कि लोगों ने अपनी पत्नियों को धमकाया, उसे बुरी तरह पीटा और जेल जैसी सज़ा भुगतने की धमकी दी। सारिका ने कहा, 'महिलाएं पहले भी पैसे बचाती रही हैं, लेकिन इस तरह कभी पैसे बचाने की बातें सामने नहीं आई। लेकिन, रातों रात वे सभी महिलाएं अपने पति की नजर में अपराधी हो गई।

टोल फ्री क्राइसिस नंबर पर नवंबर महीने में 1200 महिलाओं ने कॉल किए जबकि ऐसी कॉल्स अमूमन महीने में 500 के करीब आती थी। जिनमें 230 महिलाओं को काउंसलिंग की आवश्यकता पड़ी। आंकड़ों के विश्लेषण में यह भी पता चला कि जिन महिलाओं को काउंसलिंग की गई, उनमें से करीब 50 फीसदी नोटबंद के चलते अपने पतियों के हाथों हिंसा का शिकार हुई थी।